दैनिक खबरनामा
12 जुलाई चंडीगढ़ : सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता से जुड़े गंभीर मुद्दे पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। हिसार में वेंटिलेटर न मिलने के कारण एक नवजात की मौत के मामले में आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से 1 सितंबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा (सेवानिवृत) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक, पीजीआईएमएस रोहतक, महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, सिविल सर्जन हिसार तथा जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड, हिसार से इस मामले में जवाब तलब किया है। आयोग ने अगली सुनवाई की तिथि 1 सितंबर 2026 निर्धारित की है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि समाचारों में प्रकाशित तथ्यों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक नवजात की मृत्यु तक सीमित नहीं है। यह राज्य की आपातकालीन नवजात चिकित्सा सेवाओं, रेफरल प्रणाली और विभिन्न अस्पतालों के बीच समन्वय की व्यवस्था में गंभीर संस्थागत खामियों की ओर संकेत करता है।
मामले के अनुसार, हिसार के सिविल अस्पताल में जन्मे नवजात को जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके चलते उसे तत्काल वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता थी। हालांकि अस्पताल में मौजूद एकमात्र नवजात वेंटिलेटर पहले से ही किसी अन्य मरीज के उपयोग में था। इसके बाद शिशु को महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा और फिर पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया, लेकिन वहां भी आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। अंततः निजी अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
आयोग ने उन रिपोर्टों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिनमें हिसार सिविल अस्पताल में कई वेंटिलेटर खराब या अनुपयोगी होने की बात सामने आई है। साथ ही यह भी कहा कि रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध होने की पुष्टि न करना आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी कमी को दर्शाता है।
आयोग ने राज्य सरकार से एनआईसीयू, नवजात वेंटिलेटर की उपलब्धता, रियल-टाइम रेफरल सिस्टम, चिकित्सा उपकरणों की कार्यशील स्थिति तथा पिछले दो वर्षों में किए गए ऑडिट का विस्तृत विवरण भी मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है और इस दायित्व में किसी भी स्तर की प्रशासनिक लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।