दैनिक खबरनामा 30 मार्च 2026 रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) में करीब 75 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।यह मामला 12 मार्च 2026 को क्रेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी खातों से करोड़ों रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए और वहां से रकम आरोपी व उसके करीबी लोगों के खातों में पहुंचाई गई।प्रारंभिक जांच के अनुसार, फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए इस पूरे नेटवर्क को सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया। मामले में नगर निगम के तत्कालीन चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अकाउंट ऑफिसर नलिनी मलिक समेत अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि इनके निर्देश पर शेल कंपनियां और खाते खोले गए, और संबंधित लोगों व उनके परिजनों को करोड़ों रुपये नकद भी दिए गए।नलिनी मलिक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने करनाल में दबिश दी, लेकिन वह पहले ही फरार हो चुकी थी। पुलिस को शक है कि वह किसी रिश्तेदार के यहां छिपी हो सकती है। एक संदिग्ध मकान के बाहर खड़ी एक्सयूवी भी जांच के दायरे में है।इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो 75 करोड़ के क्रेस्ट घोटाले के साथ-साथ नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपये के फर्जी एफडी घोटाले की भी जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान और बड़े खुलासे होने की संभावना है और इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
दैनिक खबरनामा 30 मार्च 2026 रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) में करीब 75 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।यह मामला 12 मार्च 2026 को क्रेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी खातों से करोड़ों रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए और वहां से रकम आरोपी व उसके करीबी लोगों के खातों में पहुंचाई गई।प्रारंभिक जांच के अनुसार, फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए इस पूरे नेटवर्क को सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया। मामले में नगर निगम के तत्कालीन चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अकाउंट ऑफिसर नलिनी मलिक समेत अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि इनके निर्देश पर शेल कंपनियां और खाते खोले गए, और संबंधित लोगों व उनके परिजनों को करोड़ों रुपये नकद भी दिए गए।नलिनी मलिक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने करनाल में दबिश दी, लेकिन वह पहले ही फरार हो चुकी थी। पुलिस को शक है कि वह किसी रिश्तेदार के यहां छिपी हो सकती है। एक संदिग्ध मकान के बाहर खड़ी एक्सयूवी भी जांच के दायरे में है।इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो 75 करोड़ के क्रेस्ट घोटाले के साथ-साथ नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपये के फर्जी एफडी घोटाले की भी जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान और बड़े खुलासे होने की संभावना है और इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।