दैनिक खबरनामा 9 मार्च 2026 हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम (एससीडीपी) के तहत करोड़ों रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही हैं, लेकिन इन योजनाओं के लिए जमीनी स्तर पर बजट का गंभीर अभाव है। हालत यह है कि कई योजनाओं के लिए हजारों रुपये तक का प्रावधान नहीं हो पा रहा, जिससे वे कागजों में ही सिमटकर रह गई हैं।राज्य में इस कार्यक्रम के तहत करीब 4 हजार संचित कार्य तैयार हो चुके हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश धरातल पर नहीं उतर पा रहे। पूंजीगत व्यय के लिए भी नाममात्र का बजट रखा जा रहा है, जबकि नेता फील्ड में इन योजनाओं की घोषणाएं कर रहे हैं। बाद में इन्हें अलग-अलग योजनाओं में डालकर बजट का इंतजार किया जाता है, जो अक्सर नहीं मिल पाता।कई क्षेत्रों में सड़क, पेयजल और सिंचाई जैसी बुनियादी योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। शिमला के सैंज क्षेत्र में गिरि खड्ड से शिरगुली धाली सिंचाई योजना का काम पाइप बिछने के बावजूद अधूरा है। वहीं बीरगढ़ कलाहर उठाऊ सिंचाई योजना 2018-19 से अब तक शुरू नहीं हो पाई।पुरानी योजनाओं की मरम्मत के लिए भी बजट नहीं मिल रहा। बगैण और कसुम्पटी की लिफ्ट इरिगेशन स्कीमें जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन इनके सुधार के लिए भी बजट में शून्य प्रावधान है।इस पूरे मामले पर विभाग के निदेशक सुमित किमटा का कहना है कि योजनाओं को उपलब्ध बजट के अनुसार ही आगे बढ़ाया जा रहा है।
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