दैनिक खबरनामी। मोहाली, 30 अक्टूबर: सेक्टर-81 स्थित राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव-विनिर्माण संस्थान (NABI) तक सीधी आवाजाही के लिए बना पुल कई सालों से अधूरा पड़ा है। गमाडा ने नाले पर करीब 10 साल पहले पुल का निर्माण किया था, लेकिन उसे एयरपोर्ट रोड से जोड़ा नहीं गया।
ऐसे में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और आने-जाने वालों को गांवों के रास्ते या लंबा चक्कर लगाकर संस्थान तक पहुंचना पड़ता है। NABI की स्थापना करीब 5-6 साल पहले हुई थी। यहां वैज्ञानिक पोषण से भरपूर फसलें विकसित करने, उपयोगी जीन और नए मार्कर खोजने और जीनोम एडिटिंग व बायोप्रोसेसिंग तकनीक पर काम करते हैं।
पराली जैसे कृषि-औद्योगिक कचरे से वैकल्पिक प्रोटीन, जैव-ऊर्जा और उपयोगी प्रोडक्ट बनाने पर भी रिसर्च होती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुल को एयरपोर्ट रोड से जोड़ने पर मोहाली के आसपास के दर्जनों गांव चंडीगढ़ के मध्य मार्ग से सीधे जुड़ सकते हैं और इलाके के विकास को रफ्तार मिलेगी।
पुल के सामने मिट्टी खिसकने का खतरा
गमाडा की कार्यप्रणाली पर सवाल
बताया जा रहा है कि आगे एक किसान की जमीन रास्ते में बाधा बनी हुई है। करीब दस साल से काम लटका होने पर गमाडा अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। NABI के मुख्य गेट के पास बारिश के कारण मिट्टी खिसकने और जमीन कमजोर होने से धंसाव का खतरा भी है।
लोगों ने निरीक्षण, जमीन को सुरक्षित करने, सफाई व्यवस्था सुधारने और पुल को जोड़ने में आ रही अड़चनों को दूर करने की मांग की है। सेक्टर-85 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पवन सचदेवा के मुताबिक, वैकल्पिक रास्तों से समय और ईंधन की बर्बादी होती है और कारोबार व विकास पर असर पड़ता है।