दैनिक खबरनामा 23 अप्रैल 2026 मोहाली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को मरीज के इलाज का क्लेम लौटाने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि बिना ठोस सबूत के बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी है।मामले के अनुसार, संदीप सिंह ने 30 मई 2020 को अपने और माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी और समय-समय पर इसका नवीनीकरण भी करवाते रहे। 27 नवंबर 2021 को उनके पिता नरेंद्र सिंह को सीने में तेज दर्द होने पर चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर के एडवांस कार्डियक सेंटर में भर्ती कराया गया। जांच में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का पता चला और तुरंत स्टेंट (पीसीआई) प्रक्रिया की गई। इलाज पर कुल 3,72,257 रुपये खर्च हुए।संदीप सिंह ने 12 फरवरी 2022 को क्लेम दाखिल किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 28 फरवरी 2022 को इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मरीज को पहले से हाइपरटेंशन था, जिसकी जानकारी नहीं दी गई थी।आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी इस आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। केवल अस्पताल रिकॉर्ड के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जानकारी जानबूझकर छिपाने का प्रमाण देना कंपनी की जिम्मेदारी है।आयोग ने बीमा कंपनी को दो महीने के भीतर पूरी क्लेम राशि 3,72,257 रुपये देने, देरी होने पर 6% वार्षिक ब्याज चुकाने और मानसिक उत्पीड़न व मुकदमे के खर्च के लिए 25,000 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया।
You May Also Like
पंजाब विधानसभा का स्पेशल सेशन आज, मनरेगा के नाम और फंडिंग को लेकर होगा प्रस्ताव
चंडीगढ़ 30 दिसम्बर (जगदीश कुमार)केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार…
- Vishal
- December 30, 2025