दैनिक खबरनामा। चंबा, 23 जुलाई: वीरवार को चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रकृति का कहर जारी था, लेकिन इसी बीच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जवानों ने इंसानियत की मिसाल कायम की। लगातार हो रही तेज बारिश और जगह-जगह हुए भूस्खलन के बावजूद एनएचएआई की टीम ने जोखिम उठाकर एक बुजुर्ग और वेंटिलेटर पर निर्भर 7 महीने के बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाया।
दुनाली के पास तड़के करीब 3 बजे पहाड़ से भारी मलबा गिरने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। मार्ग में अन्य 12-13 जगहों पर भी पत्थर और मिट्टी आ गिरी थी। इसी दौरान भरमौर अस्पताल से एक बुजुर्ग मरीज को लेकर आ रही एंबुलेंस दुर्गेठी में फंस गई क्योंकि आगे रास्ता अवरुद्ध था।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए एनएचएआई कर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। टीम ने बुजुर्ग को पैदल चलाकर अपने पेट्रोलिंग वाहन तक पहुंचाया। फिर मशीनों की मदद से रास्ता खोलते हुए आगे बढ़े और बुजुर्ग को सुरक्षित बग्गा तक पहुंचाया। वहां से उसे एंबुलेंस के जरिए चंबा के मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
दिन में करीब 4 बजे दुर्गेठी के पास दूसरा मामला सामने आया। भरमौर की तरफ से आ रही एंबुलेंस में एक 7 महीने का शिशु सवार था जिसे तत्काल वेंटिलेटर की जरूरत थी। सड़क बंद होने के कारण एनएचएआई दल ने मासूम को गोद में लेकर मलबे और पत्थरों के बीच से रास्ता पार कराया। इसके बाद पेट्रोलिंग गाड़ी से उसे बत्ती की हट्टी तक ले जाया गया। वहां भी मार्ग बाधित मिला तो बच्चे को दूसरी ओर शिफ्ट कर दूसरे पेट्रोलिंग वाहन से बग्गा पहुंचाया गया। वहां से शिशु को तुरंत चंबा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
इस बीच चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर परेल घार में एनएचएआई की टीम को एक और हादसे का सामना करना पड़ा। साइट निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के वाहन पर अचानक एक बड़ा पत्थर गिर गया जिससे गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि साइट इंचार्ज साहिल ठाकुर, सुपरवाइजर सनी कुमार, फौजा सिंह और रविंद्र कुमार जांच के लिए पहले ही गाड़ी से बाहर निकल चुके थे, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। यही टीम बाद में दुर्गेठी में मरीजों को सुरक्षित निकालने के काम में भी जुटी रही।
लगातार बारिश और भूस्खलन के बीच एनएचएआई के इन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूझबूझ और तत्परता से दो जिंदगियां बच सकीं।