दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 6 जून 2026: मूत्राशय (ब्लैडर) कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और देश के चार अन्य प्रमुख कैंसर केंद्रों द्वारा किए गए एक बड़े क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया है कि सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी देने से कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा 50 प्रतिशत से अधिक तक कम किया जा सकता है।

यह अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है और इसे ब्लैडर कैंसर के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

शोधकर्ताओं के अनुसार, मूत्राशय कैंसर के दोबारा लौटने की स्थिति मरीजों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं और मरीजों की जीवन प्रत्याशा भी प्रभावित होती है। अध्ययन में पाया गया कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली एडजुवेंट रेडिएशन थेरेपी कैंसर की पुनरावृत्ति को प्रभावी ढंग से रोक सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस उपचार के संभावित दुष्प्रभाव सीमित हैं और उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

कैसे किया गया अध्ययन?

‘ब्लैडर एडजुवेंट रेडियोथेरेपी’ नामक इस ट्रायल में कुल 153 मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी हाल ही में ब्लैडर कैंसर की सर्जरी हुई थी।

आधे मरीजों को सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी दी गई।

शेष मरीजों को केवल नियमित चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

अध्ययन के परिणामों में स्पष्ट रूप से देखा गया कि जिन मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई थी, उनमें कैंसर के दोबारा होने का जोखिम 50 प्रतिशत से अधिक कम था।

शोधकर्ताओं का मानना है कि जिन मरीजों में कैंसर की पुनरावृत्ति का खतरा अधिक होता है, उनके लिए यह उपचार जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

क्यों गंभीर है मूत्राशय कैंसर?

मूत्राशय कैंसर दुनिया के सबसे जटिल और महंगे कैंसरों में से एक माना जाता है।

यह विश्व का नौवां सबसे आम कैंसर है।

वर्ष 2022 में दुनिया भर में 6 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए थे।

यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है।

लंबे समय तक इलाज और लगातार निगरानी की आवश्यकता के कारण इसे सबसे खर्चीले कैंसरों में भी गिना जाता है।

मरीजों के लिए नई उम्मीद

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और सहयोगी संस्थानों की यह रिसर्च ब्लैडर कैंसर के उपचार में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी को उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने से हजारों मरीजों को कैंसर की पुनरावृत्ति से बचाया जा सकेगा और उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।

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