दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 11 अगस्त 2026. पंजाब में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और अभिभावकों से अलग-अलग मदों के नाम पर राशि वसूलने के दौर पर रोक लगाने की दिशा में भगवंत सिंह मान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस संशोधन विधेयक, 2026’ को मौखिक मतों से सर्वसम्मति से पारित कर दिया है।
नए कानून के तहत निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। यदि किसी स्कूल को इससे अधिक फीस बढ़ानी है तो उसे नियामक संस्था से पहले अनुमति लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।
विधानसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिक्षा को व्यापार और विद्यार्थियों को मुनाफे का साधन नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली से सुरक्षा देना है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूल किसी भी नाम या तरीके से अभिभावकों से राशि वसूलेंगे, उसे फीस ही माना जाएगा। इसमें ट्यूशन फीस के अलावा परिवहन शुल्क, भवन निधि और अन्य छोटे-बड़े शुल्क भी शामिल होंगे। इन सभी मदों को फीस नियमन के दायरे में लाया जाएगा।
सरकार निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था की जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट भी करवाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में जिन स्कूलों ने कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करवाने की व्यवस्था की जाएगी।
कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। पहली बार नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार उल्लंघन होने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने सहित अन्य सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोविड काल के दौरान जब स्कूल बंद थे और स्कूल वाहन भी नहीं चल रहे थे, तब भी अभिभावकों से परिवहन शुल्क वसूला गया। उन्होंने कहा कि अब पंजाब में ऐसी मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंजाब में करीब 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इस कानून का उद्देश्य इन विद्यार्थियों और उनके परिवारों को मनमानी फीस वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप निजी शैक्षणिक संस्थान अलग-अलग खातों और मदों के माध्यम से शिक्षा के नाम पर मनमाने ढंग से धन नहीं जुटा सकते। इसी उद्देश्य से स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली राशि का विस्तृत आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर फोरेंसिक जांच करवाई जाएगी।
फीस वृद्धि के प्रस्तावों की जांच और नियमन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला नियामक समिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे फीस वृद्धि की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को तैयार करने का माध्यम है। इसलिए हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कभी सरकारी स्कूलों को केवल मध्याह्न भोजन तक सीमित समझा जाता था, लेकिन सरकार ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि इसका असर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2026 की नीट परीक्षा में पंजाब के 882 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की, जबकि वर्ष 2021 में यह संख्या केवल 80 थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक था। इस कानून के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पंजाब में शिक्षा को मुनाफा कमाने का माध्यम बनाने या शिक्षा माफिया को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।