दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 10 जून: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजरों द्वारा की गई कथित गोलीबारी में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत के बाद कश्मीर घाटी में नई बहस शुरू हो गई है। घाटी के विभिन्न वर्गों में यह सवाल उठने लगा है कि जिस क्षेत्र को पाकिस्तान “आज़ाद कश्मीर” कहता है, वहां लोगों की लोकतांत्रिक मांगों का जवाब बल प्रयोग से क्यों दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में जारी घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाला कश्मीर वास्तविक रूप से स्वतंत्र नहीं है, बल्कि वहां के लोगों के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकार सीमित हैं।

इस बीच, कश्मीर के प्रमुख मजहबी नेता और हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने एलओसी के उस पार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वहां से आ रही खबरें परेशान करने वाली हैं। लोगों की शिकायतों और मांगों के समाधान के लिए बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जब नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो यह उनकी आवाज सुने जाने की मांग का संकेत होता है। सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे संवाद और बातचीत के जरिए समाधान निकालें, न कि हिंसा, मनमानी गिरफ्तारियों और जनहानि का रास्ता अपनाएं।

जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानता है भारत

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर वह क्षेत्र है, जिस पर 1947 में हुए कबायली हमले के बाद पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था। इसमें गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र भी शामिल है। भारत पूरे जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। वर्ष 1994 में भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया था तथा पाकिस्तान से कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की मांग की थी।

आर्थिक संकट और सीमित अधिकारों से बढ़ रहा असंतोष

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों से बेरोजगारी, महंगाई और संसाधनों के दोहन को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ा है। वहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे पद मौजूद होने के बावजूद वास्तविक शक्तियां सीमित हैं और अधिकांश निर्णय पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे के अधीन रहते हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से अधिक राजनीतिक अधिकारों और स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।

विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें भी विवाद के केंद्र में

वर्तमान आंदोलन का नेतृत्व किसी राजनीतिक दल के बजाय स्थानीय व्यापारिक और बुद्धिजीवी संगठनों के गठबंधन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा किया जा रहा है। संगठन की प्रमुख मांगों में पीओके विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करना शामिल है। जेएएसी का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से पाकिस्तान वहां की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखता है।

घाटी में उठ रहे सवाल

कश्मीर के समाजसेवी और राजनीतिक कार्यकर्ता सलीम रेशी का कहना है कि पीओके में हो रही घटनाएं वहां के लोगों के अधिकारों की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक जावेद बेग ने इन घटनाओं के विरोध में प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) को ज्ञापन सौंपा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।

कश्मीर मामलों के जानकार रमीज मखदूमी के अनुसार, पहली बार घाटी के युवाओं के बीच पीओके की स्थिति को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि वहां के नागरिक संवैधानिक अधिकारों और बेहतर प्रशासन की मांग कर रहे हैं, तो उनकी बात संवाद के जरिए क्यों नहीं सुनी जा रही।

स्थानीय युवक गौहर ने कहा कि उसके रिश्तेदार चकोटी और रावलाकोट में रहते हैं और वह उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि बल प्रयोग से।

पीओके में जारी घटनाक्रम ने न केवल वहां के हालात पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि कश्मीर घाटी में भी लोकतांत्रिक अधिकारों, स्वायत्तता और शासन व्यवस्था को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

तीसरे दिन भी नहीं थमी सफाई कर्मियों की हड़ताल, शहरों में बढ़ी गंदगी से जनजीवन प्रभावित

दैनिक खबरनामा। ऊधमपुर, 31 मई : नगर परिषद और नगर पालिका के…
Share to :

पाक समर्थित हवाला जाल पर बड़ी चोट, जम्मू-कश्मीर में तीन लोग गिरफ्तार

दैनिक खबरनामा। जम्मू 31 मई: कठुआ में आतंकी गतिविधियों को आर्थिक सहायता…
Share to :

जम्मू-कश्मीर SI भर्ती: ओवरएज अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, CAT ने आयु सीमा में छूट की मांग ठुकराई

दैनिक खबरनामा | जम्मू, 1 जून : जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (एसआई)…
Share to :

नशे और नार्को आतंक के विरुद्ध जम्मू-कश्मीर में सख्त अभियान, पचास दिनों में एक हजार से अधिक तस्कर दबोचे

दैनिक खबरनामा। श्रीनगर 31 मई : जम्मू-कश्मीर में नशे के कारोबार और…
Share to :