दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 10 जून:  पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) के तहत हुए कथित बड़े घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पाया गया है कि ट्राइसिटी क्षेत्र के निजी अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत किए गए 50 प्रतिशत से अधिक क्लेम फर्जी थे। आरोप है कि यह पूरा खेल मंथन हेल्थकेयर और कुछ निजी अस्पतालों की मिलीभगत से संचालित किया जा रहा था। मामले में मंथन हेल्थकेयर के निदेशक डॉ. विकास, डॉ. रिंपल गुप्ता और डॉ. सुमित गौतम की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।

CBI जांच के बाद अब फर्जी क्लेम के जरिए निकाली गई राशि की वसूली संबंधित निजी अस्पतालों और मंथन हेल्थकेयर के संचालकों से किए जाने की तैयारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ECHS के तहत ट्राइसिटी क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये से अधिक का कथित फर्जीवाड़ा किया गया।

जांच के दौरान CBI ने निजी अस्पतालों से 500 से अधिक क्लेम रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए थे। चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित धर्म अस्पताल, सेक्टर-19 के केयर अस्पताल, मोहाली के शेल्बी अस्पताल, इंडस्ट्रियल एरिया स्थित ईडन अस्पताल समेत करीब एक दर्जन अस्पताल जांच के घेरे में आए हैं। सूत्रों के अनुसार धर्म अस्पताल और केयर अस्पताल में सबसे अधिक अनियमितताएं पाई गई हैं। वहीं, मंथन हेल्थकेयर पर स्वास्थ्य विभाग पहले ही कार्रवाई करते हुए ताला लगा चुका है।

जांच में जुड़ सकते हैं नए नाम

मामले में लगातार हो रहे खुलासों को देखते हुए जांच एजेंसियां कई अन्य अस्पताल संचालकों और डॉक्टरों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। अब तक डॉ. रिंपल गुप्ता, डॉ. विकास और केयर अस्पताल के एक कैशियर का नाम सामने आया था, लेकिन जांच के विस्तार के साथ कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

CBI जांच में यह भी सामने आया है कि मंथन हेल्थकेयर से जुड़े डॉ. सुमित गौतम ने कथित रूप से फर्जी टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करवाया और उनके नाम पर क्लेम दाखिल किए गए।

ECHS पैनल से हटाए जाएंगे अस्पताल

जिन अस्पतालों के नाम इस घोटाले में सामने आए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। संबंधित अस्पतालों को ECHS पैनल से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

मरीजों से पूछताछ में खुली पोल

CBI ने क्लेम रिकॉर्ड के आधार पर कई मरीजों से भी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई मरीजों ने बताया कि उन्हें वे बीमारियां या शिकायतें कभी थीं ही नहीं, जिनका उल्लेख क्लेम दस्तावेजों में किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई टेस्ट रिपोर्ट कथित रूप से फर्जी बनाई गई थीं।

मरीजों ने यह भी स्वीकार किया कि वे उतने दिनों तक अस्पताल में भर्ती नहीं रहे, जितने दिनों का दावा क्लेम में किया गया था। इन बयानों ने फर्जी क्लेम और इलाज के नाम पर हुए कथित घोटाले की परतें खोल दी हैं।

CBI अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित ECHS घोटाले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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