पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच कई अन्य सांसदों के भी इस्तीफा देने की अटकलें तेज

दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 8 जून : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को आज बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले ने पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

77 वर्षीय सुखेंदु शेखर रॉय लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की नीतियों को लेकर असहमति जताते रहे हैं। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली थी और लगातार संगठन में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा आत्ममंथन की कमी जैसे मुद्दे उठाते रहे थे।

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में रॉय ने कहा कि पार्टी के भीतर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक भी शायद इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि संगठन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रॉय के इस्तीफे से तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती खींचतान सामने आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य सांसद भी पार्टी छोड़ सकते हैं। यहां तक कि हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित एक सांसद के भी इस्तीफा देने की संभावना जताई जा रही है।

पार्टी फिलहाल अपने विधायक दल में भी असंतोष का सामना कर रही है। जानकारी के अनुसार, लगभग 60 विधायकों ने मिलकर विपक्ष के नए नेता का चयन किया है, जिसे पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत के रूप में देखा जा रहा है।

कोलकाता के आर.जी. कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद भी सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि इस जघन्य अपराध के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण उन्हें लंबे समय तक पार्टी में हाशिये पर रखा गया।

गौरतलब है कि सुखेंदु शेखर रॉय राजनीति में आने से पहले कांग्रेस से जुड़े रहे थे और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के करीबी माने जाते थे। वह वर्ष 2011 से राज्यसभा सदस्य रहे हैं। इसके अलावा वह 2024 तक तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) और 2019 तक राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

उनके इस्तीफे को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव पड़ सकते हैं।

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