दैनिक खबरनामा
22 जुलाई वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर एक और बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। कनाडा पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद अब उन्होंने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से अधिकतम 200% तक टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान किया है। हालांकि भारतीय दवा उद्योग के लिए राहत की खबर यह है कि अगले दो वर्षों तक इन दवाओं पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी देते हुए कहा कि 1 अगस्त से शुरू होने वाले पहले दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं के आयात पर 0% टैरिफ रहेगा। इसके बाद तीसरे वर्ष इसे 100% तक बढ़ाया जाएगा और फिर आगे चलकर 200% तक शुल्क लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में जेनेरिक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का प्रमुख उत्पादक माना जाता है और उसे दुनिया की ‘फार्मेसी’ भी कहा जाता है। अमेरिका में उपयोग होने वाली प्रत्येक पांच जेनेरिक दवाओं में से एक भारत में तैयार होती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की जेनेरिक दवाओं का निर्यात किया, जो देश के कुल 25.8 अरब डॉलर के दवा निर्यात का लगभग 38% हिस्सा था।
भारत से अमेरिका को हर वर्ष 10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की जेनेरिक दवाएं भेजी जाती हैं। ऐसे में ट्रंप के इस नए फैसले का तत्काल कोई असर देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि अगले दो वर्षों तक भारतीय कंपनियां बिना अतिरिक्त टैरिफ के अमेरिकी बाजार में अपनी आपूर्ति जारी रख सकेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दो वर्षीय राहत भारतीय दवा कंपनियों को भविष्य की रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय देगी। इस अवधि में कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने, स्थानीय साझेदारियों को मजबूत करने और संभावित ऊंचे टैरिफ के प्रभाव को कम करने की दिशा में कदम उठा सकती हैं।
अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अनुसार, अमेरिका में बिकने वाली 90% से अधिक दवाएं जेनेरिक श्रेणी की हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी। पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं की मौजूदा नीति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।