आगरा 27 दिसम्बर (जगदीश कुमार)भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित केंद्र और प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ नेता और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके विचारों को याद किया गया।वहीं दूसरी ओर आगरा जनपद के बटेश्वर गांव में स्थित अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक आवास इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरी तरह सूना पड़ा रहा। उनका पैतृक घर आज भी खंडहर की हालत में है, जहां न तो कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित हुआ और न ही श्रद्धांजलि देने कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी पहुंचे। गांव में इस बात को लेकर चर्चा और निराशा का माहौल देखने को मिला।बताया गया कि बटेश्वर में पहले से आयोजित कृषि मेले के चलते जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी सहित कुछ प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे, लेकिन यह दौरा भी अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती से जुड़ा नहीं था। जयंती के नाम पर केवल संकुलन केंद्र पर सफाई अभियान चलाया गया, जबकि पैतृक आवास पर श्रद्धांजलि का कोई आयोजन नहीं हुआ।गौरतलब है कि वर्ष 2023 में अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उनके पैतृक गांव बटेश्वर पहुंचे थे। उस दौरान मुख्यमंत्री ने बटेश्वर के विकास को लेकर चार बड़ी घोषणाएं की थीं। इनमें आगरा से वृंदावन तक हवाई दर्शन की सुविधा, यमुना किनारे घाटों और मंदिरों का जीर्णोद्धार, सांस्कृतिक संकुल केंद्र की स्थापना और अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक आवास के स्थान पर स्मारक निर्माण की घोषणा शामिल थी।स्थानीय लोगों का कहना है कि इन घोषणाओं के बावजूद आज तक पैतृक आवास की हालत नहीं सुधरी है। जन्म शताब्दी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी जब देश और प्रदेश स्तर पर बड़े कार्यक्रम हुए, तब अटल के पैतृक गांव में उपेक्षा साफ नजर आई। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस अवसर पर कम से कम पैतृक आवास पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम या विकास कार्यों की प्रगति दिखाई देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन घोषणाओं के सहारे बटेश्वर के विकास की उम्मीद जगी थी, वे धरातल पर कब उतरेंगी और कब अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक आवास को एक स्मारक के रूप में पहचान मिलेगी।

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