चंडीगढ़ 16 जनवरी (जगदीश कुमार)चंडीगढ़ ट्राइसिटी क्षेत्र में ऑर्थोपेडिक केयर के क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल के तहत अब एडवांस्ड रोबोटिक असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सुविधा शुरू हो गई है। चंडीगढ़ स्थित एआरवी।ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल के कंसल्टेंट और हेड डॉ. अतुल मल्होत्रा ने जॉनसन एंड जॉनसन के अत्याधुनिक Velys Robotic System के माध्यम से इस तकनीक को अपनाने वाले ट्राइसिटी के पहले सर्जन बनकर क्षेत्र को वर्ल्ड क्लास इलाज की सौगात दी है।डॉ.अतुल मल्होत्रा ने इस अवसर पर कहा कि एक सर्जन के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को सर्वोत्तम परिणाम देना है। उन्होंने बताया कि वीईएलवाईएस रोबोटिक सिस्टम के जरिए नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को बेहद सटीकता और पर्सनलाइज्ड तरीके से अंजाम देना संभव हो पाया है। इससे अनावश्यक टिश्यू डैमेज कम होता है, इम्प्लांट का बेहतर अलाइनमेंट सुनिश्चित होता है और मरीज को कम दर्द के साथ तेजी से रिकवरी मिलती है।उन्होंने आगे बताया कि यह तकनीक हर मरीज की एनाटॉमी के अनुसार सर्जरी को कस्टमाइज करने में मदद करती है, जिससे सर्जिकल ट्रॉमा घटता है और पोस्ट-ऑपरेटिव परेशानी भी कम होती है। इसका सीधा लाभ मरीजों को जल्दी चलने-फिरने और सामान्य जीवन में लौटने के रूप में मिलता है।घुटनों का गठिया और जोड़ों की डिजनरेटिव बीमारियां बढ़ती उम्र, मोटापा, आरामतलब जीवनशैली और खेल संबंधी चोटों के कारण तेजी से आम होती जा रही हैं। हालांकि, दर्द, खून की कमी और लंबी रिकवरी के डर से कई मरीज नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से कतराते हैं। रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी इन आशंकाओं को दूर करने में अहम भूमिका निभा रही है।यह अत्याधुनिक तकनीक हाई-स्पीड कैमरा, ऑप्टिकल ट्रैकर्स और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर की मदद से मरीज के घुटने का रियल-टाइम डिजिटल मैप तैयार करती है। इसकी मदद से सर्जन बिना प्री-ऑपरेटिव सीटी स्कैन के सटीक बोन कटिंग, बेहतर लिगामेंट बैलेंस और इम्प्लांट प्लेसमेंट कर सकते हैं। मिलीमीटर और डिग्री के अंशों तक की डिजिटल सटीकता से हेल्दी टिश्यू सुरक्षित रहता है, खून की कमी कम होती है और दर्द भी घटता है।वैश्विक स्तर पर किए गए क्लिनिकल अध्ययनों में सामने आया है कि रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट कराने वाले मरीजों को अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है और वे रोजमर्रा की गतिविधियों में जल्दी लौट पाते हैं। साथ ही इम्प्लांट की लंबी उम्र और बेहतर परफॉर्मेंस की संभावना भी बढ़ जाती है।इस अत्याधुनिक तकनीक को ट्राइसिटी में सबसे पहले शुरू कर एआरवी ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल ने क्षेत्र के मरीजों को मेट्रो शहरों पर निर्भर हुए बिना वर्ल्ड क्लास ऑर्थोपेडिक केयर उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यह पहल मरीजों के लिए सुरक्षित, सटीक और आधुनिक इलाज को स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

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