मध्य प्रदेश 8 जनवरी (दैनिक खबरनामा)अनूपपुर जिले में खनन माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। खनिज विभाग के कथित संरक्षण के बीच गिट्टी के अवैध परिवहन का खेल खुलेआम जारी है। आरोप है कि माफिया एक ही ट्रांजिट पास (टीपी) पर कई-कई चक्कर लगा रहे हैं, जबकि कई मामलों में बिना टीपी के ही गिट्टी का परिवहन किया जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक जिले में रॉयल्टी चोरी का यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। यही वजह है कि अब तक अवैध खनन और परिवहन पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है।वन मार्ग बना अवैध परिवहन का रास्ता
अवैध कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अब वन क्षेत्र के मार्गों का भी खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। ओढेरा ग्राम पंचायत के अकुआ गांव से खोलइया की ओर जाने वाला वन मार्ग, जो अगरियानार वन बीट के अंतर्गत आता है, गिट्टी के अवैध परिवहन का प्रमुख रास्ता बन चुका है।अकुआ से खोलइया तक का पूरा मार्ग वन क्षेत्र में आता है, जहां सामान्य वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस रास्ते से लगातार मेटाडोर और अन्य वाहन गिट्टी का परिवहन करते देखे जा रहे हैं।वन विभाग ने पकड़ा वाहन, लेकिन सवाल कायमसूचना मिलने पर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए गिट्टी का परिवहन कर रहे एक मेटाडोर (क्रमांक MP65 GA 2134) को पकड़ा। वाहन के पास रॉयल्टी पर्ची मौजूद थी, लेकिन वन मार्ग से परिवहन की अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि इसके लिए पूर्व अनुमति और निर्धारित शुल्क अनिवार्य है।सूत्रों का यह भी कहना है कि इसी मार्ग से पहले कई बार बिना रॉयल्टी पर्ची के वाहन निकाले गए, लेकिन वन विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं लगी।वन क्षेत्र में सड़क निर्माण पर गंभीर सवालसबसे बड़ा सवाल यह है कि वन क्षेत्र के भीतर सड़क किसकी अनुमति से बनाई गई। जानकारी के अनुसार मेटाडोर और भारी वाहनों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए जेसीबी मशीन से रास्ते को सुधारा गया, जबकि वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है।बारिश के बाद भी सड़क का वाहनों के लायक होना इस बात की ओर इशारा करता है कि यहां हाल ही में भारी मशीनों से कार्य किया गया है। यदि वन विभाग ने इसकी अनुमति नहीं दी, तो यह काम किसके संरक्षण में हुआ—यह जांच का विषय बना हुआ है।