दैनिक खबरनामा 4 मई 2026 चंडीगढ़ खेती में अधिक पैदावार की होड़ अब जमीन की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग की ताजा रिसर्च में सामने आया है कि आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक मिट्टी में मौजूद जरूरी सूक्ष्मजीवों को तेजी से खत्म कर रहे हैं, जिससे भविष्य में फसल उत्पादन और उर्वरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।यह शोध 31 मार्च 2026 को एक्टा साइंटिफिक एग्रीकल्चर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन विभाग के वैज्ञानिक राजनी यादव और प्रो. आनंद नारायण सिंह के नेतृत्व में इको सिस्टम एंड रिस्टोरेशन इकोलॉजी लैब में किया गया।रिसर्च के दौरान ऑर्गेनोक्लोरीन एल्ड्रिन और ऑर्गेनोफॉस्फेट फोरेट जैसे कीटनाशकों के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। इसके लिए सात अलग-अलग ट्रीटमेंट तैयार किए गए और एक, सात, 14 और 21 दिनों के अंतराल पर मिट्टी के सैंपल की जांच की गई।नतीजों में सामने आया कि कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और एक्टिनोमाइसीट्स जैसे सूक्ष्मजीवों की संख्या लगातार घट रही है। पहले ही दिन बैक्टीरिया में 17 से 45 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई, जबकि सातवें दिन यह गिरावट 54 प्रतिशत तक पहुंच गई।वैज्ञानिकों के अनुसार, सूक्ष्मजीवों की कमी से मिट्टी की जैविक गतिविधियां कमजोर होती हैं, जिससे पौधों को मिलने वाला पोषण प्रभावित होता है। यह अध्ययन पंजाब यूनिवर्सिटी के एक्सपेरिमेंटल डोम में सैंडी लोम मिट्टी पर 2019-20 से 2021-22 के रबी सीजन के दौरान किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कृषि उत्पादन पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।