दैनिक खबरनामा/ब्यूरो/चंडीगढ़/10 जून, 2026. विश्व फैटी लिवर दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने फैटी लिवर रोग और अन्य यकृत संबंधी बीमारियों के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के माध्यम से समय पर जांच, विशेषज्ञ उपचार और कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर लोगों को गंभीर लिवर रोगों से बचाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि फैटी लिवर रोग आज एक “साइलेंट महामारी” के रूप में उभर रहा है, क्योंकि इसके शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह बीमारी लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकती है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत राज्य के प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना में 2,300 से अधिक उपचार प्रक्रियाएं और विभिन्न रोग प्रबंधन पैकेज शामिल हैं, जिनका लाभ सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में लिया जा सकता है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच महीनों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत यकृत संबंधी 302 मरीजों का उपचार किया गया है। इनमें एक्यूट वायरल हेपेटाइटिस, क्रॉनिक हेपेटाइटिस और लिवर एब्सेस जैसे रोग शामिल हैं। यह आंकड़े राज्य में लिवर रोगों के बढ़ते खतरे और समय पर उपचार की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि फैटी लिवर अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं और बच्चों में भी तेजी से फैल रहा है। उन्होंने बताया कि असंतुलित खान-पान, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मधुमेह और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो जीवनशैली में सुधार और उचित चिकित्सकीय देखभाल से इसे काफी हद तक नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, तले-भुने और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी तथा शराब से परहेज करने की सलाह दी।

विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, मधुमेह, मेटाबोलिक सिंड्रोम या लिवर रोग का पारिवारिक इतिहास रखने वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन जैसी जांचें बीमारी की समय रहते पहचान करने में मददगार साबित होती हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जागरूकता, नियमित जांच और बेहतर जीवनशैली ही फैटी लिवर रोग के बढ़ते खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से पंजाब सरकार राज्यभर में स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाओं को लगातार मजबूत कर रही है।

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