दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 20 जुलाई: केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून में बड़ा बदलाव करने जा रही है। भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी शामिल किया जाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को मानसून सत्र के पहले ही दिन यह विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत करेंगे। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम’ का अपमान करता है या इसके गायन में व्यवधान डालता है तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, आर्थिक दंड अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही इस संशोधन को मंजूरी दे चुका है। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी दर्जा देना है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश भेजे हैं कि जिन सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान गाया जाता है, वहां ‘वंदे मातरम’ को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
सरकार इस साल ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रही है और इसके लिए पूरे वर्ष चलने वाले कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी पृष्ठभूमि में यह विधायी कदम उठाया गया है।
इस मुद्दे पर सियासी टकराव की संभावना भी जताई जा रही है। ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल से थे, लिहाजा भाजपा ने इसे बंगाली अस्मिता से जोड़कर पेश किया है। विधानसभा चुनाव के कारण तृणमूल कांग्रेस ने इस पर खुला विरोध नहीं किया, लेकिन पिछले एक साल में कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं ने या तो गीत गाने से इनकार किया या इसे सांप्रदायिक कहकर विवाद खड़ा किया।
भाजपा का आरोप है कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते अब तक ‘वंदे मातरम’ को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार है। सोमवार को राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल इस विधेयक के वहां पारित होने के बाद इसे लोकसभा में लाया जाएगा।