सात महीनों में 1,440 तस्कर गिरफ्तार, 1,201 मामले दर्ज; 51 अवैध पिस्तौल और 133 कारतूस बरामद
दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़/जालंधर, 7 अगस्त 2026. जालंधर में नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। आधुनिक तकनीक, खुफिया जानकारी और जमीनी स्तर पर मजबूत पुलिसिंग के दम पर कमिश्नरेट पुलिस जालंधर ने पिछले सात महीनों में नशा तस्करों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। पुलिस ने मादक पदार्थों से संबंधित कानून के तहत 1,201 मामले दर्ज कर 1,440 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस की रणनीति अब केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे नेटवर्क को एक साथ निशाना बनाया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत नशे के कारोबार के वित्तीय स्रोतों, हथियारों, परिवहन व्यवस्था, सहयोगियों और नए सदस्यों की भर्ती के तंत्र पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
करोड़ों के नशे के कारोबार पर चोट
‘नशों के विरुद्ध युद्ध’ अभियान के तहत जालंधर पुलिस ने इस अवधि में 16.810 किलोग्राम हेरोइन, 119 ग्राम मेथामफेटामाइन, 9.274 किलोग्राम अफीम, 24.624 किलोग्राम गांजा, 33.750 किलोग्राम भुक्की, 20 ग्राम कोकीन, 15.200 किलोग्राम चरस और 3,130 नशीले कैप्सूल व गोलियां बरामद की हैं।
इसके अलावा 11,17,900 रुपये की ड्रग मनी और नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी जब्त किया गया। पुलिस के अनुसार इन कार्रवाइयों से सड़कों से नशीले पदार्थ हटाने के साथ-साथ नशे के कारोबार को आर्थिक सहायता देने वाले नेटवर्क को भी कमजोर किया गया है।
अवैध हथियारों पर भी बड़ी कार्रवाई
नशे के साथ-साथ संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले अवैध हथियारों के खिलाफ भी पुलिस ने अभियान तेज किया है। ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत जालंधर पुलिस ने 51 अवैध पिस्तौल और 133 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस ने अवैध हथियारों के आपूर्तिकर्ताओं, गैंगस्टरों के सहयोगियों और उनके मददगारों की पहचान कर उन पर निगरानी भी बढ़ाई है। इसका उद्देश्य अपराधियों तक हथियार पहुंचने से पहले ही उनकी आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना है।
45 आपातकालीन वाहन और 14 मोटरसाइकिल गश्ती दल तैनात
अपराध की रोकथाम के लिए जालंधर में 45 आपातकालीन प्रतिक्रिया वाहन और 14 मोटरसाइकिल गश्ती दल तैनात किए गए हैं। इन इकाइयों में कुल 209 पुलिसकर्मी ड्यूटी निभा रहे हैं।
शहर के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर स्थायी रात के नाके लगाए गए हैं। वाहन आंकड़ा तंत्र के माध्यम से वास्तविक समय में वाहनों की जांच की जा रही है, जिससे चोरी किए गए या संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर भी प्रभावी रोक लगाई जा रही है।
तकनीक बनी अपराधियों के लिए बड़ी चुनौती
पंजाब कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली, एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र, विस्तारित सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क और डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशाला के इस्तेमाल से पुलिस की जांच क्षमता मजबूत हुई है।
अब जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, वाहनों के रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना और अपराध के सबूत मिटाना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो गया है।
नशा मुक्ति पर भी पुलिस का जोर
पुलिस की रणनीति केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं है। नशे की मांग को कम करने और प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जनवरी 2026 से अब तक 1,300 लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल कराया गया, जबकि 1,509 लोगों को बाह्य रोगी ओपिओइड उपचार केंद्रों में भेजा गया। इसके अलावा 504 पात्र लोगों को मादक पदार्थ एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 64-ए के तहत राहत दी गई।
महत्वपूर्ण मामलों का भी हुआ खुलासा
इस वर्ष जालंधर पुलिस ने बीएसएफ चौक विस्फोट मामले को सुलझाते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पाकिस्तान स्थित संचालकों से संबंधों का पता लगाया।
पुलिस ने एक देश-विरोधी मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया, जिस पर पाकिस्तान स्थित संचालकों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप था। इन मामलों ने खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई और वैज्ञानिक जांच की प्रभावशीलता को भी सामने रखा है।
अपराधियों के लिए जगह और संसाधन लगातार किए जा रहे सीमित
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग का लक्ष्य केवल अलग-अलग गिरफ्तारियां करना नहीं, बल्कि संगठित अपराध के वित्तीय स्रोतों, हथियारों, परिवहन, तकनीकी साधनों और सहयोगी तंत्र को एक साथ निशाना बनाना है।
पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह ने कहा कि जालंधर पुलिस का उद्देश्य हर कार्रवाई के माध्यम से अपराध की कई कड़ियों को एक साथ कमजोर करना है। नशे की आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने से लेकर अवैध हथियारों की बरामदगी, गैंग से जुड़े लोगों की पहचान, तकनीक के इस्तेमाल और रोकथाम आधारित पुलिसिंग तक हर कदम का उद्देश्य संगठित अपराधियों के लिए काम करना और अपने नेटवर्क को बनाए रखना मुश्किल बनाना है।
जालंधर पुलिस के अनुसार अब रणनीति केवल अपराध सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के लिए स्थान, संसाधन और नेटवर्क—तीनों को लगातार सीमित करने पर केंद्रित है।