दैनिक खबरनामा। गोपेश्वर/ चमोली 14 अगस्त: अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे के बाद बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबा और पानी में दबने से अब तक 9 मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं, जबकि 6 लोग अभी भी अंदर फंसे बताए जा रहे हैं।
यह घटना 13 अगस्त को शाम करीब पौने 7 बजे हुई। उस समय सुरंग के भीतर 25 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे थे। हादसे में घायल हुए 10 लोगों का जिला अस्पताल गोपेश्वर में इलाज चल रहा है। एक-एक घायल को श्रीनगर और पीपलकोटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
प्रशासन के अनुसार, ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
पानी और कीचड़ बना सबसे बड़ी बाधा
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा ने बताया कि दलदल, तेज पानी के बहाव और ऑक्सीजन की कमी के चलते रात में बचाव अभियान को रोकना पड़ा था। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू शुरू किया गया और टीमें अंदर फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं।
क्या हुआ था सुरंग के अंदर
टीएचडीसी और एनटीपीसी द्वारा संयुक्त रूप से बनाई जा रही 444 मेगावाट की इस परियोजना का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। 3.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग में हादसा 1.8 किलोमीटर अंदर वाले हिस्से में हुआ। उस वक्त ग्रेविटी सेक्शन में पैकिंग और शटरिंग का काम चल रहा था।
प्रत्यक्षदर्शी झारखंड निवासी निस्तरा भिंगरा ने गोपेश्वर अस्पताल में बताया कि अचानक तेज धमाके की आवाज आई। इसके तुरंत बाद सुरंग की ऊपरी सतह से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा अंदर घुस आया। संभलने का मौका किसी को नहीं मिला। लोग इधर-उधर बिखर गए। वह खुद भी पानी के साथ बहते हुए बाहर की तरफ आ रहे थे, लेकिन बीच में कीचड़ में फंस गए।
चीख-पुकार के बीच अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका मलबे से भर गया।
फिलहाल प्रशासन, एनडीआरएफ और परियोजना की टीमें मिलकर लापता 6 श्रमिकों की तलाश में जुटी हैं। सुरंग के अंदर हालात बेहद कठिन बताए जा रहे हैं क्योंकि जगह-जगह पानी और गाद जमा है।