दैनिक खबरनामा। मोहाली, 20 अगस्त: पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन यानी PSIEC के तहत मोहाली के फोकल प्वाइंट में स्थित 2.112 एकड़ व्यावसायिक भूखंड के आवंटन मामले में अब विभागीय स्तर पर जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय की 4 से 6 अगस्त तक चली कार्रवाई के बाद निगम के निदेशक मंडल ने इस प्रकरण की तथ्यात्मक पड़ताल के लिए दूसरे विभागों के अफसरों को शामिल कर एक कमेटी बनाने का फैसला किया है।
14 अगस्त को हुई PSIEC बोर्ड की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, इस चर्चा में भूखंड आवंटन से जुड़े अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया। बैठक में सामने आया कि इस जमीन को ई-नीलामी पर डालने से पहले न तो मौके का मुआयना कराया गया और न ही कोई व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई।
जमीन को “जैसी स्थिति में है” के आधार पर नीलाम किया गया था। उस समय साइट पर एक इमारत का कुछ हिस्सा, डीजी सेट, पंप चैंबर और ट्यूबवेल पहले से मौजूद थे।
आवंटन पत्र की शर्तों में बाद में बदलाव
बोर्ड के सामने यह तथ्य भी आया कि आवंटन पत्र जारी होने के बाद उसकी कुछ शर्तों में बदलाव कर दिए गए। कार्यवृत्त में दर्ज है कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिए बिना ही इन बदलावों को अमल में लाया गया। इसके चलते मौके पर बने ढांचे और अन्य अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी अब PSIEC के सिर आ गई है।
यह मामला 2020 का है। उस वर्ष PSIEC ने पटियाला की फर्म आइकानिक स्पेस क्रिएटर्स को यह 2.112 एकड़ भूखंड 33.33 करोड़ रुपये में आवंटित किया था। ED ने अपनी कार्रवाई के दौरान कहा था कि नीलामी के वक्त तय नियमों से हटकर बाद में शर्तें बदलकर आवंटी को गैर-जरूरी फायदा पहुंचाया गया।
कीमत को लेकर भी उठे सवाल
जमीन की दर भी जांच के दायरे में है। 2020 में इस साइट का आवंटन 32,600 रुपये प्रति वर्ग गज की दर पर हुआ, जबकि PSIEC अधिकारियों के मुताबिक आसपास के इलाके में वर्ष 2005 में ही एक प्लॉट 60,000 रुपये प्रति वर्ग गज में दिया जा चुका था। 15 साल के अंतराल के बाद व्यावसायिक भूखंड की इतनी कम कीमत पर नीलामी को लेकर सवाल उठना लाजमी है।
विवाद गहराने के बाद पंजाब सरकार ने 2023 में इस आवंटन को रद्द कर दिया था। फिलहाल मामला मध्यस्थता के स्तर पर है और आवंटी कंपनी अब तक सिर्फ करीब 4.99 करोड़ रुपये ही जमा करवा पाई है।
भविष्य में वित्तीय नुकसान रोकने पर फोकस
PSIEC के चेयरपर्सन दलवीर सिंह ने कहा कि आवंटन प्रक्रिया में कई खामियां मिली हैं और बाद में शर्तें बदलकर आवंटी को अनुचित लाभ देने की बात सामने आई है। ई-नीलामी के बावजूद प्रक्रिया में विसंगतियां रहीं।
इसी कारण तथ्यात्मक जांच कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी न सिर्फ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करेगी, बल्कि आगे चलकर निगम के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी सिफारिशें भी देगी।