चंडीगढ़ 17 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सीवरेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े टेंडरों की शर्तों में व्यापक बदलाव करते हुए ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ा दी है। अब केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि प्लांट के संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) की जिम्मेदारी भी निर्धारित अवधि तक संबंधित एजेंसी को निभानी होगी। सरकार का उद्देश्य प्लांटों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना और प्रदूषण संबंधी समस्याओं पर नियंत्रण पाना है।नई नीति के तहत परियोजनाओं को तीन श्रेणियों—40 एमएलडी तक की क्षमता वाले एसटीपी, 40 एमएलडी से अधिक क्षमता वाले एसटीपी और बिना ओ एंड एम श्रेणी—में विभाजित किया गया है। 40 एमएलडी तक के एसटीपी में कुल लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा निर्माण कार्य पर और 20 प्रतिशत संचालन एवं रखरखाव पर खर्च होगा। निर्माण लागत में 40 प्रतिशत सिविल वर्क, 40 प्रतिशत मैकेनिकल वर्क तथा 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल एवं इंस्ट्रूमेंटेशन पर निर्धारित किया गया है।बिना ओ एंड एम श्रेणी में केवल सीवरेज नेटवर्क का निर्माण होगा। इसमें तीन वर्ष का डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड तय किया गया है। सुरक्षा राशि तीन चरणों में—पहले और दूसरे वर्ष के बाद 30-30 प्रतिशत तथा तीसरे वर्ष के बाद 40 प्रतिशत—लौटाई जाएगी। परफॉर्मेंस बैंक गारंटी की पांच प्रतिशत राशि तीन साल पूरे होने के 45 दिन बाद जारी होगी।सरकार का कहना है कि पहले निर्माण के बाद रखरखाव में लापरवाही से कई प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पाते थे, जिससे ओवरफ्लो और प्रदूषण की समस्या बढ़ती थी। अब भुगतान की शर्तों को सख्त कर गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। सभी विभागों को भविष्य के टेंडरों में नई शर्तें अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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