चंडीगढ़ 24 फरवरी 2026(दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर खरीदे-बेचे गए हजारों मकानों को जल्द मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। प्रशासन ने नवंबर 2011 के सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले Suraj Lamp & Industries Pvt. Ltd. v. State of Haryana का दोबारा अध्ययन कर नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस संबंध में मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद को विस्तृत नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, नवंबर 2011 तक जीपीए, विल या वसीयतनामा के आधार पर जिन संपत्तियों का लेन-देन हुआ या जिन पर वर्तमान में कब्जा है, उन्हें नियमित करने के लिए नीति लाई जाएगी। वहीं 2011 के बाद जीपीए के जरिए हुए सौदों को वैधता देने के मुद्दे पर प्रशासन ने अपने लीगल रिप्रेजेंटेटिव से विस्तृत कानूनी सलाह मांगी है।शहर के विभिन्न गांवों और कॉलोनियों में अनुमानतः 40 हजार से अधिक मकान ऐसे हैं, जो 2011 के बाद भी जीपीए के माध्यम से बिकते रहे। सेक्टर-29, 30, 31, रामदरबार, मलोया और सेक्टर-38 वेस्ट सहित कई इलाकों में ईडब्ल्यूएस और स्मॉल फ्लैट श्रेणी के मकान 20 से 25 लाख रुपये तक में जीपीए पर बेचे गए। कई संपत्तियां पिछले 12-13 वर्षों में तीन से चार बार तक जीपीए के जरिए बेची जा चुकी हैं। इन सौदों में न तो विधिवत रजिस्ट्री हुई और न ही प्रशासन को स्टांप ड्यूटी या रजिस्ट्रेशन शुल्क का लाभ मिला।प्रस्तावित नीति के तहत यदि जीपीए पर बिके मकानों को मालिकाना हक देने का प्रावधान किया जाता है तो संपत्ति धारकों को कलेक्टर रेट के अनुसार रजिस्ट्रेशन शुल्क और अन्य निर्धारित फीस जमा करनी होगी। इससे प्रशासन को बड़े पैमाने पर राजस्व मिलने की संभावना है और हजारों परिवारों को कानूनी स्वामित्व का अधिकार मिल सकेगा।गौरतलब है कि नवंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने Suraj Lamp & Industries Pvt. Ltd. v. State of Haryana मामले में स्पष्ट किया था कि जीपीए, विल या एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर संपत्ति का हस्तांतरण पूर्ण स्वामित्व नहीं माना जाएगा। हालांकि उस समय तक हुए सौदों को एकमुश्त राहत दी गई थी। अब प्रशासन इसी फैसले के आधार पर पुरानी और 2011 के बाद की संपत्तियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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