पंजाब 15 मार्च 2026 (जगदीश कुमार) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि राज्य में उद्योग और वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए लुधियाना, न्यू चंडीगढ़ (मोहाली) और अमृतसर में तीन विश्व स्तरीय प्रदर्शनी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के बनने से उद्योगों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए मजबूत मंच मिलेगा।
मोहाली में आयोजित प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में उद्योगपतियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में बड़े प्रदर्शनी केंद्रों की कमी के कारण उद्योगों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार नई दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर इन तीन शहरों में आधुनिक प्रदर्शनी केंद्र स्थापित करेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन निवेशकों के लिए विचार साझा करने और नए अवसरों की तलाश का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य और निवेशकों दोनों को लाभ होगा और पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य को पारंपरिक कृषि से मूल्यवर्धित निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को किसानों की समृद्धि की कुंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। पठानकोट की लीची, होशियारपुर के आम और जालंधर के आलू जैसे उत्पादों को फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पंजाब की अर्थव्यवस्था को तैयार कर रही है। उनका लक्ष्य पंजाब को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने निवेशकों को पंजाब में निवेश करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि राज्य निवेश के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करता है।देश की खाद्य सुरक्षा में पंजाब की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य हर वर्ष लगभग 185 लाख मीट्रिक टन चावल और 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन करता है, जिसके कारण पंजाब को देश का अन्नदाता कहा जाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विविधीकरण समय की जरूरत है और किसानों को गेहूं-धान के पारंपरिक चक्र से बाहर निकालने के लिए व्यावहारिक विकल्प देने होंगे। फूड प्रोसेसिंग को इस दिशा में एक प्रभावी समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसानों को बेहतर आय मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार नई औद्योगिक नीति के तहत फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए सब्सिडी को बढ़ाकर 125 प्रतिशत तक कर रही है। इसके साथ ही बासमती चावल में कीटनाशक अवशेषों की जांच के लिए मोहाली में एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में पहले से कार्यरत अंतरराष्ट्रीय कंपनियां राज्य के औद्योगिक माहौल में वैश्विक विश्वास को दर्शाती हैं। राज्य में टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट, एफएमसीजी और निर्माण सामग्री जैसे मजबूत औद्योगिक क्षेत्र मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब फिलहाल 7 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के सामान का निर्यात करता है और कृषि, इंजीनियरिंग उत्पाद, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट और फार्मास्यूटिकल जैसे क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति रखता है। राज्य में 14 लाख से अधिक एमएसएमई उद्योग कार्यरत हैं, जो रोजगार और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य निर्माण क्षमता को मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़कर राज्य को उत्तरी भारत का प्रमुख निर्यात केंद्र बनाना है। उन्होंने उद्योगपतियों, निर्यातकों और लॉजिस्टिक कंपनियों को पंजाब में निवेश और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।टिकाऊ विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में हर वर्ष लगभग 20 मिलियन टन धान की पराली पैदा होती है, जिसे बायोमास ऊर्जा, कम्प्रेस्ड बायोगैस और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से उपयोग में लाया जा रहा है।इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा और गुरमीत सिंह खुड्डियां सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।