दैनिक खबरनामा 11 अप्रैल 2026 पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चों के साथ यौन अपराध (POCSO) मामलों में सजा तय करने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, अपराध की सजा उतनी ही कठोर होनी चाहिए। साथ ही, यदि अपराध में एक से अधिक आरोपी शामिल हों तो सजा और बढ़ाई जानी चाहिए।यह टिप्पणी लुधियाना में 4 साल 7 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान की गई। मामले में 28 वर्षीय आरोपी सोनू सिंह ने बच्ची को उसके दादा की चाय की दुकान से बहला-फुसलाकर ले जाकर वारदात को अंजाम दिया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि देश में POCSO मामलों में सजा तय करने के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी है, जिसके कारण फैसलों में असंगति देखने को मिलती है। इस कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने नया मानक निर्धारित किया है। इसके तहत सहमति की कानूनी उम्र को आधार मानते हुए, पीड़ित की उम्र जितनी कम होगी, सजा उतनी बढ़ेगी।कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की उम्र 5 साल से कम थी और आरोपी अकेला था। इस आधार पर दुष्कर्म के लिए 25 साल के कठोर कारावास को उचित माना गया। वहीं हत्या के लिए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसमें कम से कम 50 साल तक बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने सबूतों के आधार पर आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन यह भी माना कि हत्या पूर्वनियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के सबूत मिटाने के लिए घबराहट में की गई। इसी आधार पर मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं रखा गया और मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया।