दैनिक खबरनामा 16 अप्रैल 2026 हरियाणा में ग्रुप C और ग्रुप D के करीब 4600 कर्मचारियों के भविष्य को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट अपना अहम फैसला सुनाने जा रहा है। यह मामला 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार द्वारा बनाई गई नियमितीकरण (पक्का करने) की नीति से जुड़ा है, जो पिछले सात वर्षों से कानूनी विवाद में घिरा हुआ है।दरअसल, 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद राज्य सरकार ने एक विशेष पॉलिसी के तहत विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया था। इस नीति के तहत हजारों कर्मचारियों को सरकारी सेवा में स्थायी कर दिया गया, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे।इसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिस पर सुनवाई करते हुए 2018 में हाईकोर्ट ने इस पॉलिसी को रद्द कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सरकारी नौकरियों में नियुक्ति और नियमितीकरण तय नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही होना चाहिए।हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रभावित कर्मचारियों और अन्य पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। लंबी सुनवाई के बाद 4 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया जाएगा।इस फैसले का सीधा असर हजारों कर्मचारियों की नौकरी और सेवा शर्तों पर पड़ेगा। अगर हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है, तो कर्मचारियों की नियुक्ति पर संकट आ सकता है। वहीं, यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश को पलटता है, तो कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी और उनकी नौकरी को कानूनी मान्यता मिल जाएगी।यह फैसला न केवल इन कर्मचारियों के भविष्य को तय करेगा, बल्कि हरियाणा में सरकारी भर्ती और नियमितीकरण की नीतियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
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- Editorial Team
- June 23, 2026