दैनिक खबरनामा । मुंबई, 16 जून : ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री (Mis-selling) पर रोक लगाने हेतु नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उनके एजेंटों द्वारा ग्राहकों को भ्रमित करने वाली बिक्री तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर प्रतिबंध लगाया गया है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान अब अपनी वेबसाइट, मोबाइल एप्लीकेशन और अन्य बिक्री माध्यमों पर ऐसे डिज़ाइन या प्रक्रियाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे, जो ग्राहकों को अनजाने में किसी उत्पाद या सेवा को चुनने के लिए प्रेरित करें। केंद्रीय बैंक ने इन निर्देशों को फरवरी में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान की गई घोषणा के बाद जारी किया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का होगा नियमित ऑडिट
नए नियमों के अनुसार, सभी विनियमित संस्थाओं को अपने डिजिटल इंटरफेस का समय-समय पर ऑडिट कराना होगा, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रामक या अनुचित फीचर की पहचान कर उसे हटाया जा सके। यह प्रावधान आरबीआई के ‘जिम्मेदार व्यापार आचरण दिशानिर्देशों’ (Responsible Business Conduct Guidelines) में किए गए संशोधनों का हिस्सा है। ये नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
गलत बिक्री की व्यापक परिभाषा तय
आरबीआई ने ‘गलत बिक्री’ की परिभाषा को भी विस्तृत किया है। इसके अंतर्गत ऐसे मामलों को शामिल किया गया है, जिनमें:
ग्राहक की जरूरतों के अनुरूप न होने वाले उत्पाद बेचना,
भ्रामक या अधूरी जानकारी देना,
स्पष्ट सहमति के बिना किसी उत्पाद की बिक्री करना,
एक उत्पाद खरीदने के लिए दूसरे उत्पाद को अनिवार्य रूप से जोड़ना (टाई-इन सेलिंग)।
ग्राहकों को मिलेगा पूरा मुआवजा
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यदि किसी वित्तीय उत्पाद या सेवा की गलत बिक्री साबित होती है, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी। साथ ही ग्राहक को बिक्री रद्द किए जाने की सूचना भी देनी होगी।
इन नए नियमों को वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।