दैनिक खबरनामा 3 अप्रैल 2026 चंडीगढ़ में भाजपा के पंजाब मुख्यालय पर हुए ग्रेनेड हमले के बाद शहर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हमलावर न सिर्फ आसानी से दफ्तर तक पहुंचे, बल्कि ब्लास्ट करने के बाद उसका वीडियो रिकॉर्ड कर फरार भी हो गए। हैरानी की बात यह है कि आरोपी चंडीगढ़ से निकलकर पंजाब पहुंच गए और करीब 30 घंटे बाद उनकी लोकेशन रोपड़ में ट्रेस की जा सकी।इस पूरे घटनाक्रम ने चंडीगढ़ पुलिस की तत्परता और सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रिटायर्ड एसपी रोशन लाल ने कहा कि पहले चंडीगढ़ पुलिस की पहचान ऐसी थी कि यहां अपराध तो हो सकता था, लेकिन अपराधी शहर से बाहर नहीं निकल पाता था। मौजूदा हालात में यह सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है।
रोशन लाल के मुताबिक, पहले पीसीआर की ऐसी प्लानिंग होती थी कि शहर का कोई हिस्सा बिना कवरेज के न रहे। इसी वजह से किसी भी वारदात के बाद 2 से 3 मिनट में पुलिस मौके पर पहुंच जाती थी।उन्होंने यह भी बताया कि पहले वारदात के तुरंत बाद शहर के बॉर्डर सील कर दिए जाते थे और पुलिस टीमें बॉर्डर की ओर रवाना हो जाती थीं, क्योंकि अपराधी आमतौर पर शहर छोड़कर भागने की कोशिश करते हैं। इस रणनीति से कई बड़े केस जल्दी सुलझाए गए।इसके अलावा, उस समय 16 बॉर्डर पोस्ट सक्रिय रहती थीं, जहां पैरामिलिट्री फोर्स और लोकल गाइड तैनात होते थे। उनके पास आपसी समन्वय के लिए संचार के पर्याप्त साधन होते थे, जिससे 6 से 7 मिनट के भीतर ही संदिग्धों की पहचान और पकड़ संभव हो जाती थी।इस घटना के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या चंडीगढ़ पुलिस का सुरक्षा तंत्र पहले की तरह सक्रिय और प्रभावी है या फिर सिस्टम में ढिलाई आ गई है।