दैनिक खबरनामा चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026 शहर में सुरक्षा के नाम पर लगाए जा रहे पुलिस नाके अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। पिछले एक महीने से एक ही जगह और तय समय पर लगाए जा रहे इन नाकों की वजह से इनका सरप्राइज एलिमेंट लगभग खत्म हो चुका है। स्थिति यह है कि आम लोगों के साथ-साथ अपराधी भी इनकी लोकेशन और टाइमिंग भांप चुके हैं, जिससे उनके लिए वैकल्पिक रास्तों से निकलना आसान हो गया है।
इस समय शहर में करीब 50 स्थानों पर 24 घंटे पुलिस नाके लगाए जा रहे हैं। सेक्टर-8/9, 9/10, 18/19 और 36/37 जैसी डिवाइडिंग सड़कों समेत कई प्रमुख जगहों पर लगातार एक ही स्थान पर नाके लगाए जा रहे हैं। पुलिसकर्मी शिफ्टों में ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन एक ही जगह लंबे समय तक तैनाती से उनकी सतर्कता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नाका लगाने का उद्देश्य तभी सफल होता है, जब इसे रोटेशनल तरीके से लागू किया जाए। बीपीआरडीओ की एक रिसर्च के अनुसार, नाके 2 से 3 घंटे के अंतराल में अलग-अलग स्थानों पर लगाए जाने चाहिए। इससे न केवल अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल होता है, बल्कि पुलिसकर्मी भी अधिक सतर्क रहते हैं।विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से पुलिसकर्मियों में थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि नाकों पर मौजूद पुलिसकर्मी केवल खड़े रहते हैं और वाहन बिना जांच के निकल जाते हैं। रोटेशनल व्यवस्था से इस स्थिति में सुधार संभव है।दरअसल, 17 मार्च को पंजाब यूनिवर्सिटी में एक छात्र नेता पर फायरिंग और 18 मार्च को सेक्टर-9 में दिनदहाड़े चमनप्रीत उर्फ चिन्नी की हत्या के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई थी। इन घटनाओं के बाद शहरभर में 24 घंटे नाके लगाने के आदेश दिए गए थे। वर्तमान में हर थाने के अंतर्गत दो और हर चौकी के तहत एक नाका लगाया जा रहा है, जहां लगातार चालान भी किए जा रहे हैं।हालांकि, अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या फिक्स लोकेशन पर लगाए जा रहे ये नाके वास्तव में सुरक्षा बढ़ा रहे हैं या फिर अपराधियों के लिए आसान रास्ता साबित हो रहे हैं।