दैनिक खबरनामा 2 अप्रैल 2026 पंजाब सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) के हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताया कि डीए (महंगाई भत्ता) जारी करना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है और इसे केंद्र सरकार के बराबर लागू करना अनिवार्य नहीं है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित इस मामले में सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य कैबिनेट केंद्र के समान दरों पर डीए बढ़ोतरी लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। सरकार के अनुसार, डीए की किस्तें जारी करना राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर लिया जाने वाला निर्णय है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1 जुलाई 2023 से लागू होने वाली डीए किस्तें अब तक राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को नहीं दी गई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अखिल भारतीय सेवा और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र के पैटर्न पर समय पर डीए मिल रहा है, जबकि अन्य कर्मचारी और पेंशनर्स इससे वंचित हैं, जो भेदभावपूर्ण है।सरकार ने यह भी बताया कि 18 फरवरी 2025 को राज्य कैबिनेट ने बकाया भुगतान के लिए चरणबद्ध योजना को मंजूरी दी है। संशोधित वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन, डीए और लीव एनकैशमेंट सहित कुल वित्तीय बोझ करीब 14,191 करोड़ रुपये है।यह मामला लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ा है। यदि अदालत का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आता है, तो राज्य सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है।