दैनिक खबरनामा 25 अप्रैल 2026 पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन (फैमिली पेंशन) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल कानूनी रूप से मान्य (वैध) पत्नी ही पेंशन की हकदार होती है। अदालत ने कहा कि अवैध विवाह से किसी महिला को न तो पत्नी का दर्जा मिलता है और न ही वह विधवा के रूप में फैमिली पेंशन का दावा कर सकती है।
मामले में एक महिला ने खुद को मृत सेना अधिकारी की दूसरी पत्नी बताते हुए फैमिली पेंशन की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि उसका विवाह उस समय हुआ था जब अधिकारी की पहली शादी वैध थी और पहली पत्नी जीवित थी। हालांकि बाद में पहली पत्नी की मृत्यु हो गई, जिसके आधार पर महिला ने खुद को विधवा मानते हुए पेंशन का अधिकार जताया।हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि फैमिली पेंशन का अधिकार मृत कर्मचारी की मृत्यु के समय उसकी वैध वैवाहिक स्थिति पर निर्भर करता है। बाद की परिस्थितियों के आधार पर यह अधिकार उत्पन्न नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पहली शादी के दौरान दूसरी शादी की जाती है, तो वह स्वतः अवैध मानी जाती है। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद भी इस अवैध विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी को न तो कानूनी पत्नी और न ही विधवा का दर्जा मिलेगा।जस्टिस संदीप मौदगिल ने अपने फैसले में कहा कि पहली शादी के रहते दूसरी शादी कानूनन शून्य होती है और इससे किसी भी प्रकार का वैधानिक अधिकार, जैसे फैमिली पेंशन, उत्पन्न नहीं होता।