दैनिक खबरनामा। तेहरान, 17 जून : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की दिशा में तैयार किए गए रूपरेखा समझौते में 300 अरब डॉलर के एक निजी निवेश फंड का प्रावधान किया गया है, जिसकी आधे से अधिक राशि पहले ही विभिन्न निवेशकों द्वारा प्रतिबद्ध की जा चुकी है। इस समझौते से जुड़े एक सूत्र ने यह जानकारी दी।

सूत्र के अनुसार, इस फंड का उद्देश्य ईरान में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देना और दोनों पक्षों को अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करना है। अमेरिका और ईरान शुक्रवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहे हैं।

बताया गया है कि यह फंड पूरी तरह निजी क्षेत्र के निवेश से संचालित होगा और इसमें किसी भी सरकार की प्रत्यक्ष वित्तीय भागीदारी या अनुदान शामिल नहीं होगा। अमेरिका, खाड़ी देशों, एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका की कंपनियों ने इसमें निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

निवेश ऊर्जा, परिवहन, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इस फंड को “रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट फंड” नाम दिए जाने की संभावना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फंड को अमेरिकी निवेश बताने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका इसमें कोई धनराशि नहीं लगा रहा है। उन्होंने कहा, “हम निवेश नहीं कर रहे हैं, हम एक पैसा भी नहीं दे रहे।”

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है तो उसे खाड़ी देशों द्वारा समर्थित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड तक पहुंच मिल सकती है।

ईरानी सूत्रों के अनुसार, तेहरान ने युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रारंभिक तौर पर अमेरिका से 400 अरब डॉलर की मांग की थी, लेकिन वाशिंगटन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद पुनर्निर्माण फंड का विचार सामने आया।

इस व्यवस्था के तहत क्षेत्रीय देश ऋण, क्रेडिट लाइन या सीधे वित्तपोषण के माध्यम से युद्ध में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। इसमें इस्पात संयंत्रों, रिफाइनरियों, हवाई अड्डों और अन्य आधारभूत संरचनाओं का पुनर्निर्माण शामिल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रही ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। ईरान दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में से एक का मालिक है और उसके पास विशाल तेल संसाधन भी मौजूद हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह निवेश फंड अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील और विदेशों में जमे ईरानी धन की रिहाई से जुड़ी समानांतर वार्ताओं से अलग होगा। अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ही यह फंड औपचारिक रूप से अस्तित्व में आएगा।

प्रस्तावित समझौते के तहत अगले 60 दिनों में ईरानी अधिकारियों और निवेशकों के साथ मिलकर संभावित परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस अवधि के दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी वार्ता जारी रहेगी।

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