नैरोबी, 19 जून। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में जारी इबोला प्रकोप के दौरान अब तक 75 स्वास्थ्यकर्मी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 17 की मौत हो गई है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को दी।
डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन निदेशक मैरी रोज़लीन बेलिज़ेयर ने पूर्वी कांगो से वीडियो लिंक के माध्यम से आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को इस महामारी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही स्वास्थ्यकर्मियों की गंभीर कमी है और ऐसे में बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मियों का संक्रमित होना चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला वायरस आधिकारिक तौर पर 15 मई को प्रकोप घोषित किए जाने से कई महीने पहले से ही समुदाय में फैल रहा था। इसके कारण अनेक डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को यह जानकारी होने से पहले ही संक्रमण का सामना करना पड़ा कि क्षेत्र में इबोला मौजूद है।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दस्ताने, मास्क और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की कमी बनी हुई है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कांगो में स्वास्थ्यकर्मियों का अनुपात दुनिया के सबसे कम स्तरों में से एक है। संगठन के आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रति 10,000 लोगों पर केवल लगभग 11 स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध हैं।
बेलिज़ेयर ने बताया कि संकट से निपटने के लिए चीन और युगांडा अपने चिकित्सा दल कांगो भेज रहे हैं। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ उन स्वास्थ्यकर्मियों को मनोवैज्ञानिक सहायता भी प्रदान कर रहा है जो अपने सहयोगियों को बीमार पड़ते और जान गंवाते देखने के बाद मरीजों का इलाज करने से भयभीत हो गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला प्रकोप पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।