दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 27 अक्टूबर 2026. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार से श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने और इसे लगातार चालू रखने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के मामलों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए और संगत की आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। पंजाब विधानसभा ने भी कॉरिडोर दोबारा खोलने और श्रद्धालुओं के लिए गुरुद्वारा दरबार साहिब के निर्बाध दर्शन सुनिश्चित करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया।
विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को संकीर्ण राजनीतिक विचारों का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए। लोगों की आध्यात्मिक आकांक्षाओं का सम्मान करना जरूरी है। श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोला जाना चाहिए, ताकि संगत बिना किसी बाधा के इस पवित्र स्थल के दर्शन कर सके।
श्री गुरु नानक देव जी के ‘सर्वत्र के भले’ के संदेश को ध्यान में रखते हुए सदन ने कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव पारित किया। इसमें केंद्र सरकार से कॉरिडोर दोबारा खोलने, इसे निरंतर चालू रखने और पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब तक सिख श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई।
प्रस्ताव में कहा गया कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर केवल भारत और पाकिस्तान के बीच आने-जाने का मार्ग नहीं, बल्कि लाखों सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी भाईचारे से जुड़ा विषय है। केंद्र सरकार से तीर्थयात्रा की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत करने का भी आग्रह किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कॉरिडोर से जुड़ी पाबंदियां और रुकावटें दुनिया भर में बसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्रा संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन कर सकें।
कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि श्री करतारपुर साहिब ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ के सिद्धांतों की पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर महज एक रास्ता नहीं, बल्कि सिख संगत को उस धरती से जोड़ने वाला पुल है, जहां गुरु साहिब ने अपने पवित्र चरण रखे थे।