दैनिक खबरनामा।चंडीगढ़, 23 जून 2026. संगरूर से लोकसभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर ने पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने वाले सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश में सुरक्षित, समावेशी और मानव-केंद्रित परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों और चिंताओं की पुष्टि करता है।
मीत हेयर ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और अन्य गैर-मोटर चालित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने 31 जुलाई 2025 को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या वह पैदल यात्रियों और कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं के सुरक्षित आवागमन के अधिकार को मान्यता देती है और उनके लिए सुरक्षित व सुलभ आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सांसद ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे के बावजूद केंद्र सरकार ने उस समय केवल औपचारिक और अस्पष्ट जवाब दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सुरक्षित आवागमन को अधिकार के रूप में स्वीकार करने या राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए व्यापक सुविधाएं विकसित करने संबंधी कोई स्पष्ट नीति या रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया था और केवल मौजूदा दिशा-निर्देशों तथा सड़क सुरक्षा ऑडिट का हवाला दिया गया था।
मीत हेयर ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग-3 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है, जो अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत प्रदत्त आवागमन की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लाखों पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय भविष्य की सड़क परियोजनाओं में फुटपाथों, सुरक्षित सड़क पार मार्गों, सार्वभौमिक पहुंच और पैदल यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। उनके अनुसार सड़क अवसंरचना का विकास केवल वाहनों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जरूरतों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि संविधान के भाग-3 के अंतर्गत पैदल चलना एक मौलिक अधिकार है और यह अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत प्राप्त आवागमन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, जिसे संविधान के अन्य मौलिक अधिकारों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।
मीत हेयर ने विश्वास व्यक्त किया कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में सुरक्षित और सम्मानजनक आवागमन के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करेगा तथा सड़क विकास की भविष्य की नीतियों को अधिक जन-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।