दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 16 जुलाई: पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने गुरु अमरदास थर्मल प्लांट, गोइंदवाल साहिब में पहले काम कर रहे 108 कर्मचारियों को अपने ढांचे में समायोजित करने की मंजूरी दे दी है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि प्लांट का पीएसपीसीएल में विधिवत विलय अब तक पूरा नहीं हो सका है।

सरकार द्वारा पूर्व में जीवीके समूह के इस थर्मल संयंत्र को अपने अधीन लिए जाने के बाद निगम ने वहां कार्यरत स्टाफ का पूरा ब्योरा मांगा था। जीवीके प्रबंधन ने 108 लोगों की सूची सौंपी। इसी सूची के आधार पर पीएसपीसीएल ने संयंत्र के संचालन को ध्यान में रखते हुए पदों का नया खाका तैयार किया।

कैसे तय हुए पद

540 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट के लिए बनाई गई नई संरचना में अधीक्षण अभियंता का कोई पद शामिल नहीं किया गया है। इसके बजाय विद्युत शाखा में सहायक कार्यकारी अभियंता के 30 और सहायक अभियंता के 27 पद तय किए गए हैं।

प्रशासन और लेखा विंग के लिए दो वरिष्ठ सहायक, एक अपर डिवीजन क्लर्क, एक उप मुख्य लेखा अधिकारी, दो लेखा अधिकारी और दो सहायक लेखा अधिकारी के पद रखे गए हैं।

वेतन और समायोजन का आधार

निगम के अनुसार समायोजन मौजूदा पद और कार्य अनुभव को देखते हुए किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि केवल कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मौजूदा वेतन पीएसपीसीएल में समान पद पर काम कर रहे अधिकारियों से ज्यादा है, बाकी अधिकांश स्टाफ का वेतन कम है।

फिलहाल सभी को पहले वाला वेतन और भत्ते ही मिलते रहेंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि तेलंगाना में कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस में तैनात कुछ कर्मचारियों को भी इन्हीं पदों पर समायोजित किया जा सकता है।

पीएसपीसीएल के अफसरों ने स्पष्ट किया कि यह नए पदों का सृजन नहीं है। सरकारी अधिग्रहण के बाद यह सिर्फ पदों का पुनर्गठन है और जीवीके के कर्मियों को इन्हीं स्वीकृत पदों पर रखा जा रहा है।

विलय पर सवाल, गठित हुई समिति

भविष्य में अगर इन 108 में से कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है तो खाली होने वाले पद पर अब नियमित पीएसपीसीएल कर्मचारी की भर्ती की जाएगी। समायोजन के दौरान आ सकती विसंगतियों को निपटाने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाई गई है।

गौरतलब है कि पीएसपीसीएल ने 12 जनवरी 2026 को गुरु अमरदास थर्मल प्लांट में स्टाफ की जरूरत आंकने के लिए एक समिति बनाई थी। यह फैसला निदेशक मंडल की 29 दिसंबर 2025 को हुई 120वीं बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर हुआ था।

108 पदों को मंजूरी मिलने के बावजूद प्लांट के औपचारिक विलय का मामला अब भी लटका हुआ है, जिसके कारण यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

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