दैनिक खबरनामा | 10 जून, 2026 पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress (टीएमसी) को उस समय बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
सुष्मिता देव पहले कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रह चुकी हैं और 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं और बाद में राज्यसभा भेजा था। ऐसे में उनका इस्तीफा राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में टीएमसी के वरिष्ठ नेता Sukhendu Sekhar Roy भी पार्टी छोड़ चुके हैं। रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। लगातार दो प्रमुख नेताओं के इस्तीफों ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की अटकलों को और बल दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के अंदर लंबे समय से चल रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। कुछ नेताओं के भाजपा से संपर्क में होने की चर्चाएं भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर रही हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व इन घटनाओं को व्यक्तिगत निर्णय बताकर नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर रहा है।
ममता बनर्जी के सामने चुनौती
ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब पार्टी की एकजुटता बनाए रखना और नाराज नेताओं को साधना होगी। पश्चिम बंगाल में लंबे समय से मजबूत स्थिति रखने वाली टीएमसी के लिए लगातार इस्तीफे आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सुष्मिता देव आगे किस राजनीतिक राह का चयन करेंगी, लेकिन उनके इस्तीफे ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की गतिविधियों और संभावित राजनीतिक पुनर्संरेखण पर सभी की नजरें