दैनिक खबरनामा। चेन्नई, 7 जून 2026: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में राज्य की शराब बिक्री व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और राजस्व रिसाव पर सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) के माध्यम से होने वाली शराब बिक्री से प्राप्त प्रत्येक रुपये का हिसाब सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की अनौपचारिक वसूली या “पार्टी फंड” व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि TASMAC नेटवर्क के जरिए हर महीने लगभग 102 करोड़ रुपये कथित रूप से अनौपचारिक “पार्टी फंड” के नाम पर अलग किए जा रहे थे। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में करीब 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं हुई हो सकती हैं।
4,048 आउटलेट्स की कार्यप्रणाली की होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को TASMAC के थोक और खुदरा नेटवर्क में लंबे समय से चल रही कथित नकद वसूली व्यवस्था को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं। राज्यभर में TASMAC के लगभग 4,048 पंजीकृत बिक्री केंद्र संचालित हैं, जिनकी कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
आबकारी मंत्री के. विग्नेश को सौंपी गई जिम्मेदारी
इन सुधारों की निगरानी निषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश करेंगे। पहली बार मंत्री बने 37 वर्षीय विग्नेश ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार को भ्रष्टाचार या जनता की परेशानी से अर्जित धन की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का निर्देश स्पष्ट है—राजस्व की चोरी और फिजूलखर्ची को तुरंत रोका जाए तथा जनता का पैसा सरकारी खजाने में वापस लाया जाए।”
कैसे काम करता था कथित कलेक्शन सिस्टम?
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार, TASMAC की सप्लाई चेन में पिछले करीब दो दशकों से कथित तौर पर एक अनौपचारिक वसूली तंत्र सक्रिय था।
बताया गया कि:
शराब के प्रत्येक केस पर लगभग 90 रुपये कथित “पार्टी फंड” के रूप में वसूले जाते थे।
बीयर के एक केस पर लगभग 40 रुपये और वाइन के केस पर करीब 20 रुपये अतिरिक्त लिए जाते थे।
यह राशि वेयरहाउस, परिवहन और खुदरा बिक्री स्तर तक विभिन्न माध्यमों से एकत्र की जाती थी।
अधिकारियों के अनुसार, हर महीने लगभग 88 लाख उपभोक्ता TASMAC से शराब खरीदते हैं और इसी आधार पर लगभग 102 करोड़ रुपये प्रतिमाह अनौपचारिक चैनलों में जाने का अनुमान लगाया गया है।
खाली बोतलों के डिपॉजिट सिस्टम की भी होगी जांच
सरकार TASMAC आउटलेट्स पर लागू 10 रुपये प्रति बोतल डिपॉजिट एवं रिफंड व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है। वर्तमान प्रणाली के तहत ग्राहक शराब की बोतल खरीदते समय अतिरिक्त 10 रुपये जमा करते हैं, जो खाली बोतल लौटाने पर वापस किए जाते हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था में नकद लेन-देन के कारण अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई थी।
आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर महीने लगभग एक करोड़ शराब की बोतलें बिकती हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में बोतलों की वापसी का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। अधिकारियों का अनुमान है कि केवल बोतल वापसी प्रणाली में अनियमितताओं के कारण ही हर महीने करीब 300 करोड़ रुपये तक का भ्रष्टाचार हो सकता है।
डिजिटल सिस्टम और प्रशासनिक सुधारों की तैयारी
सरकार अब 10 रुपये की डिपॉजिट राशि को सीधे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में शामिल करने अथवा डिजिटल रिफंड प्रणाली लागू करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। साथ ही शराब की खरीद, भंडारण, परिवहन, खुदरा बिक्री और बोतल वापसी तक पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधारों की तैयारी की जा रही है।
राजस्व से आगे की सोच
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शराब बिक्री को केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं माना जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।