दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 9 जून : देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में आने वाले वर्षों में काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि अगले तीन वर्षों में टीसीएस में एआई एजेंटों की संख्या कर्मचारियों के बराबर पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी सर्विसेज इंडस्ट्री के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर है।
टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी की एआई आधारित आय लगातार बढ़ रही है। पिछले चार तिमाहियों में एआई कारोबार की चक्रवृद्धि तिमाही वृद्धि दर (CQGR) 22 प्रतिशत रही है, जबकि पिछली तिमाही में एआई से कंपनी की वार्षिक आय लगभग 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
उन्होंने कहा कि टीसीएस अपने इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है, क्योंकि एआई वैश्विक टेक्नोलॉजी सर्विस इंडस्ट्री को तेजी से बदल रहा है। उनके अनुसार, एआई अपनाने के कारण दुनिया भर की लगभग तीन-चौथाई कंपनियां अगले दो वर्षों में टेक्नोलॉजी पर अपना निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
कंप्यूटर से निकलकर वास्तविक दुनिया में पहुंचेगा AI
चंद्रशेखरन ने कहा कि फिलहाल एआई मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित है, लेकिन जल्द ही इसका विस्तार स्टोर, फैक्ट्रियों, वेयरहाउस, ऊर्जा नेटवर्क, वाहनों और सप्लाई चेन जैसे वास्तविक क्षेत्रों तक होगा। इसके लिए ऐसे पेशेवरों की आवश्यकता होगी जो आईटी, एआई और भौतिक बुनियादी ढांचे को एक साथ जोड़ने की क्षमता रखते हों।
नौकरियों पर खतरे की आशंका को बताया गलतफहमी
आईटी सेक्टर में एआई के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि एआई इंसानी नौकरियों की जगह ले लेगा। उनके अनुसार, एंटरप्राइज सिस्टम में एआई की भूमिका को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं। एआई मानव क्षमताओं को बढ़ाने और उत्पादकता में सुधार लाने का माध्यम बनेगा, न कि केवल रोजगार समाप्त करने का।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और आईटी सेक्टर पर दबाव के बावजूद टीसीएस के बुनियादी संकेतक मजबूत बने हुए हैं। कंपनी का मार्जिन स्थिर है, राजस्व में वृद्धि हो रही है और डील पाइपलाइन भी मजबूत बनी हुई है।