दैनिक खबरनामा/ब्यूरो/चंडीगढ़/10 जून, 2026. पंजाब में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित छत्तबीर चिड़ियाघर स्कूल क्लब लगातार विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। पिछले चार वर्षों के दौरान क्लब से 4,850 स्कूल जुड़े हैं, जिनमें 2,800 सरकारी और 2,050 निजी शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इस अवधि में 4.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेकर वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी समझ को विकसित किया है।

वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में संचालित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल चिड़ियाघर भ्रमण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें अनुभवात्मक शिक्षा के जरिए पर्यावरण संरक्षण के महत्व से भी परिचित कराया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2022-23 में 83,049 विद्यार्थियों ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। वर्ष 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 1,37,011 तक पहुंच गई, जो लगभग 65 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। वर्ष 2024-25 में 1,11,731 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 89,288 विद्यार्थी पहले ही क्लब की गतिविधियों से जुड़ चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की लगभग समान भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता समाज के सभी वर्गों में बढ़ रही है।
छत्तबीर चिड़ियाघर स्कूल क्लब के तहत विद्यार्थियों के लिए पूरे वर्ष गाइडेड टूर, वन्यजीव कार्यशालाएं, ईको-लर्निंग कार्यक्रम, प्रकृति शिविर और विशेषज्ञों द्वारा विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास और जैव विविधता के महत्व के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल ने चिड़ियाघरों की पारंपरिक छवि को बदलते हुए उन्हें ‘लिविंग क्लासरूम’ में परिवर्तित कर दिया है, जहां विद्यार्थी किताबों से बाहर निकलकर प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से समझने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही भविष्य के पर्यावरण संरक्षकों और जागरूक नागरिकों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में भी यह कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहा है।
वन विभाग का मानना है कि ऐसी पहलें न केवल विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करती हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए भी प्रेरित करती हैं।