दैनिक खबरनामा 27 मार्च 2026 लुधियाना: वर्ष 2012 के चर्चित APL गेहूं घोटाले में लुधियाना की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई है। स्पेशल जज अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत ने 23 मार्च को सभी आरोपियों को दोषी करार देने के बाद अब सजा का ऐलान किया।इस मामले में कुल 30 आरोपी शामिल थे। इनमें से 17 को दोषी पाया गया, जबकि 6 आरोपियों को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। वहीं 5 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, एक आरोपी को भगोड़ा घोषित किया गया है और एक के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।अदालत ने 13 दोषियों को 5-5 साल की सजा सुनाई है, जबकि 4 आरोपियों को 4-4 साल की जेल दी गई है। दोषियों में ज्यादातर डिपो होल्डर हैं। इसके अलावा एक फ्लोर मिल मालिक और एक निजी फर्म का संचालक भी इस घोटाले में शामिल पाया गया।घोटाले की पृष्ठभूमियह मामला 1 सितंबर 2012 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि सरकारी योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को वितरित किए जाने वाले 1100 से अधिक गेहूं के बैग फर्जी गेट पास के जरिए गोदाम से बाहर निकाले गए। बाद में इन्हें निजी फ्लोर मिलों को बेच दिया गया। यह गेहूं माछीवाड़ा स्थित पंजाब एग्रो के गोदाम से उठाया गया था, जिसे पनग्रेन को भेजा जाना था।bजांच में क्या सामने आया विजिलेंस जांच में सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत उजागर हुई। फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी गेहूं की हेराफेरी कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। अदालत ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया।APL योजना क्या है?APL योजना के तहत गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस घोटाले में इसी योजना का दुरुपयोग किया गया।