चंडीगढ़, 5 जून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अपनाई गई पंजाब सरकार की “मदर अप्रोच” (MOTHER Approach) ने नवजात और बच्चों की जान बचाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसी व्यापक रणनीति के परिणामस्वरूप पंजाब देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां शिशु एवं नवजात मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम दर्ज की गई है।
हाल ही में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2024 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 16 दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 है। इसी तरह नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 11 तथा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 19 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के साथ पंजाब ने नवजात मृत्यु दर को कम करने संबंधी सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को निर्धारित समय-सीमा 2030 से पहले ही प्राप्त कर लिया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह उपलब्धि एनएचएम के सहयोग से विकसित “मदर अप्रोच” का परिणाम है। इस मॉडल के तहत मातृ स्वास्थ्य, सामुदायिक जागरूकता, तकनीक आधारित नवजात देखभाल, मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार तथा रेफरल नेटवर्क को एकीकृत रूप से मजबूत किया गया है।
मातृ स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
‘एम’ यानी मातृ स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की शीघ्र पहचान और उपचार को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, प्रसव एवं नवजात देखभाल तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए रेफरल प्रणाली को मजबूत किया गया है। जन्मजात एवं गुणसूत्र संबंधी विकारों की प्रारंभिक पहचान के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को मुफ्त लेवल-2 अल्ट्रासोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
जागरूकता और तकनीक का प्रभाव
‘ओ’ यानी आउटरीच एंड अवेयरनेस के तहत ‘केयर कंपेनियन प्रोग्राम’ को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक विस्तारित किया गया है। इसके माध्यम से स्तनपान, पोषण, स्वच्छता और नवजात शिशु की देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ाई गई है।
वहीं ‘टी’ यानी टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड नियोनेटल केयर के तहत सभी जिला अस्पतालों में समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए सीपीएपी सहायता शुरू की गई है। नवजात स्थिरीकरण सेवाओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों की रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
स्वास्थ्य ढांचे का व्यापक विस्तार
‘एच’ यानी मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत सीमावर्ती एवं दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को विशेष भत्ते दिए गए हैं, जिससे वहां स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रही है।
‘ई’ यानी एक्सपेंडेड नियोनेटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत राज्य में 24 स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू/एनआईसीयू), 81 न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) और 208 न्यूबॉर्न केयर कॉर्नर (एनबीसीसी) स्थापित किए गए हैं। इससे बीमार और समय से पहले जन्मे बच्चों को विशेष देखभाल उपलब्ध हो रही है।
साझेदारी और रेफरल नेटवर्क से बेहतर हुई सेवाएं
‘आर’ यानी रेफरल नेटवर्क्स एंड पार्टनरशिप्स के तहत आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत एनएबीएच मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है। साथ ही, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों को विशेषज्ञ केंद्रों से जोड़ने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया गया है। इससे उपचार की निरंतरता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार हुआ है।
एनएफएचएस-6 में भी दिखा सकारात्मक असर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) के आंकड़े भी पंजाब की इस रणनीति की सफलता की पुष्टि करते हैं। 6 से 8 महीने के बच्चों में पूरक आहार की दर 46.2 प्रतिशत से बढ़कर 58.2 प्रतिशत हो गई है। पूर्ण टीकाकरण का दायरा 76.2 प्रतिशत से बढ़कर 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। खसरा और रोटावायरस टीकाकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार हुआ है। कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या 59.7 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई है, जबकि संस्थागत प्रसव 94.3 प्रतिशत से बढ़कर 96.1 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।
बच्चों के पोषण संबंधी परिणामों में भी सुधार देखने को मिला है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में नाटापन (स्टंटिंग) 24.5 प्रतिशत से घटकर 20.4 प्रतिशत रह गया है, जबकि बाल मोटापे की दर 4.1 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बना पंजाब मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की “मदर अप्रोच” इस बात का प्रमाण है कि यदि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्रभावी रणनीति, मजबूत स्वास्थ्य ढांचे, प्रशिक्षित मानव संसाधनों, सामुदायिक भागीदारी और निरंतर निवेश के साथ लागू किया जाए तो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।