दैनिक खबरनामा 16 अप्रैल 2026 हरियाणा के जल अधिकारों से जुड़े लंबे समय से लंबित रावी-व्यास विवाद में अब हलचल तेज हो गई है। 18 अप्रैल को रावी-व्यास ट्रिब्यूनल बोर्ड की उच्चस्तरीय जांच कमेटी झज्जर जिले का दौरा करेगी। यह दौरा सिर्फ औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत समझकर पानी के बंटवारे पर ठोस आधार तैयार करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
करीब 40 साल बाद इस स्तर पर फील्ड विजिट हो रही है, जिससे हरियाणा को बड़ी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि कमेटी की रिपोर्ट भविष्य में जल बंटवारे को लेकर निर्णायक साबित हो सकती है।
दौरे के दौरान कमेटी साल्हावास पंप हाउस और आसपास के सिंचाई क्षेत्रों का गहन निरीक्षण करेगी। नहरों की स्थिति, पानी उपलब्धता, वितरण प्रणाली और किसानों तक पहुंचने वाले पानी की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। कमेटी का मुख्य उद्देश्य भाखड़ा डैम से हरियाणा को मिलने वाले पानी की वास्तविक जरूरत को समझना और उसी आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना है।
इस निरीक्षण में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड व मौजूदा जज, हरियाणा सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। वहीं, विभागीय मंत्री श्रुति चौधरी भी मौके पर मौजूद रहकर पूरे निरीक्षण की निगरानी करेंगी।झज्जर के अकेहड़ी मदनपुर गांव में स्थित साल्हावास पंप हाउस इस दौरे का केंद्र रहेगा, जिसे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पानी लिफ्टिंग पंप हाउस माना जाता है। यह दक्षिण हरियाणा के जल प्रबंधन की रीढ़ है और हजारों किसानों के साथ-साथ गुरुग्राम, महेंद्रगढ़ और नारनौल जैसे क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को भी पूरा करता है।
1939 में एक छोटे नाले के रूप में शुरू हुई यह परियोजना आज भाखड़ा नहर प्रणाली का अहम हिस्सा बन चुकी है। सरकार ने इसके आधुनिकीकरण पर 127 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जबकि 2018 में मोटरों के नवीनीकरण से इसकी क्षमता बढ़ाई गई। वर्तमान में यहां से 3100 क्यूसेक से अधिक पानी लिफ्ट कर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है।गौरतलब है कि रावी-व्यास जल विवाद 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद शुरू हुआ था, जो आज तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया। सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर इस विवाद का मुख्य केंद्र है। जहां पंजाब अतिरिक्त पानी न होने का दावा करता है, वहीं हरियाणा 1981 के समझौते के आधार पर अपने हिस्से की मांग करता रहा है। यह मामला वर्षों से अदालतों और ट्रिब्यूनल में लंबित है।