दैनिक खबरनामा 29 मार्च 2026 भारत में मियादी बुखार (टाइफाइड) अब केवल एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन और वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस बीमारी के कारण देश को हर साल करीब 12,300 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। चिंताजनक बात यह है कि इस कुल खर्च का 91 प्रतिशत बोझ सीधे मरीजों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है।रिपोर्ट के अनुसार इलाज का बढ़ता खर्च हजारों परिवारों को आर्थिक तबाही की ओर धकेल रहा है। 70 हजार से अधिक परिवार “कैटास्ट्रॉफिक हेल्थ कॉस्ट” की स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें अपनी आय का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इलाज पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में उनके लिए भोजन, आवास और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है।यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ: साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुआ है, जो इस समस्या की गंभीरता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करता है। रिपोर्ट बताती है कि टाइफाइड का सबसे अधिक असर 10 साल से कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है। देश में इसके आधे से ज्यादा मामले महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से सामने आते हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।एक और बड़ी चिंता एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) है। टाइफाइड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं तेजी से बेअसर हो रही हैं, जिससे इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दवा प्रतिरोध के कारण कुल इलाज लागत का 87 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो रहा है।जनवरी 2026 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में टाइफाइड के 49,30,326 मामले दर्ज किए गए, जबकि 7,850 लोगों की मौत हुई। इन मामलों का करीब 29 प्रतिशत बोझ दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक पर रहा। पांच से नौ साल के बच्चों में संक्रमण और दवा-प्रतिरोधी मामलों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई, जबकि छह महीने से चार साल तक के बच्चों में अस्पताल में भर्ती और मृत्यु का खतरा अधिक रहा। पांच साल से कम उम्र के करीब 3.21 लाख बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और समय पर टीकाकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किए बिना इस बीमारी पर काबू पाना मुश्किल होगा।

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