दैनिक खबरनामा। जालंधर, 20 अगस्त: त्योहारों की दस्तक के साथ ही रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। पिछले दो महीने में खुदरा बाजार में चीनी 20 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई है।
स्थानीय थोक कारोबारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मिल स्तर से ही शुरू हुई है। दो महीने पहले तक जो चीनी 44 से 45 रुपये किलो बिक रही थी, अब वह 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर अब घरों के साथ-साथ मिठाई और बेकरी कारोबार पर भी दिखेगा।
बंद मिलें और स्टॉक की सीमा बनी वजह
थोक विक्रेताओं के अनुसार अप्रैल के आखिर में चीनी मिलें बंद हो जाती हैं और नई पेराई अक्टूबर के अंत या नवंबर में शुरू होती है। बीच के इन महीनों में आपूर्ति घटने से दामों में तेजी आ जाती है।
इस बीच सरकार ने थोक डीलरों के लिए 4 हजार क्विंटल तक स्टॉक रखने की सीमा भी तय कर रखी है। जिले में अभी करीब 25 थोक डीलर सक्रिय हैं जो रोजाना औसतन 3 हजार क्विंटल चीनी की बिक्री करते हैं। यह चीनी हलवाइयों, होटलों, रेस्तरां और घरेलू जरूरतों में जाती है।
मिठाई-बेकरी के दाम भी बढ़े
रक्षाबंधन के बाद से त्योहारी सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की मांग तेज हो जाती है। कारोबारियों को डर है कि चीनी की कीमत बढ़ने से इन चीजों के रेट भी ऊपर जाएंगे।
रेलवे रोड पर बेकरी चलाने वाले एसएस विज का कहना है कि कच्चे माल के महंगे होने से उनके उत्पादों के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसी तरह शक्ति नगर के हलवाई अश्वनी साहनी बताते हैं कि मिठाई में सबसे ज्यादा चीनी लगती है, इसलिए उनके यहां भी कीमतों में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
नवंबर में राहत की उम्मीद
मंडी फैंटनगंज के थोक चीनी व्यापारी अनिल सोनी का मानना है कि नवंबर में जब मिलों में गन्ने की पेराई शुरू होगी, तब जाकर कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। तब तक उपभोक्ताओं को महंगी चीनी के साथ ही त्योहार मनाने पड़ेंगे।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि मांग बढ़ने के इस दौर में जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।