मुख्यमंत्री का दायित्व है श्री अकाल तख्त के आदेशों का पालन करना, आप विधायकों के रवैये पर भी उठाए सवाल
दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 29 जून : पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि सिखों के धार्मिक मामलों से जुड़े किसी भी कानून को बनाने से पहले सरकार के लिए श्री अकाल तख्त साहिब से सलाह-मशवरा करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार को श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों का सम्मान करते हुए उसके सुझावों और संशोधनों को कानून में शामिल करना चाहिए।
राजा वड़िंग ने कहा कि वर्ष 1959 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और वरिष्ठ अकाली नेता मास्टर तारा सिंह के बीच हुए समझौते में भी यह व्यवस्था तय की गई थी कि सिखों के धार्मिक मामलों से संबंधित निर्णय लेने से पहले श्री अकाल तख्त साहिब से परामर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का उल्लेख हाल ही में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने भी किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि पंजाब सरकार श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों को गंभीरता से लेते हुए तख्त द्वारा सुझाए गए सभी आवश्यक संशोधनों और बदलावों को प्रस्तावित कानून में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन ने भी सिख समुदाय से विचार-विमर्श किए बिना सिखों के धार्मिक मामलों से संबंधित कोई कानून एकतरफा लागू नहीं किया था।
राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी के सिख विधायकों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की अनुमति का इंतजार करना अनुचित है।
उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि सिख समुदाय की आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में, जब श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें एक सिख होने के नाते आमंत्रित किया था, तो उन्हें किसी भी राजनीतिक नेतृत्व या पार्टी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी, चाहे वह उनकी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ही क्यों न हों।
राजा वड़िंग ने कहा कि मुख्यमंत्री सहित सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों और मर्यादा का सम्मान करें तथा सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप निर्णय सुनिश्चित करें।