बोले- पंजाब की जवानी में ‘चिट्टा’ घोलने वाली बादल सरकार में भाजपा भी थी साझेदार, नशा, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर केंद्र को घेरा
दैनिक खबरनामा मोहाली, 1 अक्टूबर। पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब से 31 दिसंबर 2029 तक नशा खत्म करने के दावे पर सवाल उठाते हुए भाजपा को भी राज्य में नशे की समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशा माफिया को संरक्षण देने वाली पिछली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में भाजपा भी बराबर की भागीदार थी। ऐसे में अब नशा मुक्त पंजाब बनाने के दावे करना भाजपा के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब में ‘चिट्टे’ के प्रसार और युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने के लिए तत्कालीन बादल सरकार की नीतियां जिम्मेदार रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों युवाओं का जीवन नशे की वजह से बर्बाद हुआ और भाजपा भी उस समय सत्ता में गठबंधन की साझेदार थी। उन्होंने अमित शाह से सवाल किया कि यदि भाजपा के पास नशे पर अंकुश लगाने की प्रभावी रणनीति है, तो उसे पहले अपनी सरकारों वाले राज्यों में लागू क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस नेता ने अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान महंगाई और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का मुद्दा नहीं उठाए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर 4.82 प्रतिशत और खाद्य महंगाई दर 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को आम जनता की रोजमर्रा की परेशानियों पर भी जवाब देना चाहिए।
सिद्धू ने शेयर बाजार में आई गिरावट और विदेशी निवेशकों की निकासी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सितंबर 2026 में निफ्टी 50 में 6.1 प्रतिशत और सेंसेक्स में 5.8 प्रतिशत की मासिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 2.7 अरब डॉलर की निकासी की। उन्होंने सवाल किया कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है।
किसानों की मांगों और एमएसपी पर जवाब मांगा
कृषि कानूनों के मुद्दे पर सिद्धू ने कहा कि पंजाब के किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष करते रहे हैं। केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी और बाद में संसद ने इन्हें निरस्त कर दिया था। उन्होंने कहा कि अमित शाह को पंजाब दौरे के दौरान किसानों की लंबित मांगों, विशेषकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य सवालों पर भी अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में किसानों, युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। पंजाब आने वाले केंद्रीय नेताओं को रोजगार, कृषि, आर्थिक हितों और नशे जैसी गंभीर समस्याओं पर ठोस जवाब देना चाहिए।
गोवा और गुजरात में नशा तस्करी पर उठाए सवाल
सिद्धू ने अमित शाह से सवाल किया कि यदि भाजपा के पास नशे को खत्म करने का कोई प्रभावी फॉर्मूला है, तो गोवा और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों में नशे के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा में ड्रग टूरिज्म और गुजरात के समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से नशा तस्करी की समस्या गंभीर है।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ और केंद्रीय एजेंसियों की मौजूदगी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के जरिए नशे की तस्करी जारी है। सिद्धू ने केंद्र सरकार पर सीमा पार से होने वाली तस्करी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात के समुद्री बंदरगाहों के जरिए नशीले पदार्थों की बड़ी खेपें आने के मामलों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया
कांग्रेस नेता ने कहा कि अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों, विशेषकर बंदी सिंहों की रिहाई, पर भी कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री का दौरा पंजाब के ज्वलंत मुद्दों पर ठोस चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहा।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब के लोग नशे, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की मांगों, एमएसपी और राज्य के आर्थिक हितों पर स्पष्ट नीतियां और जमीनी स्तर पर कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं और नारों से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। केंद्र सरकार को अपनी नीतियों और कार्यों के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।