दैनिक खबरनामा चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026 खेती में अधिक उत्पादन की होड़ अब मिट्टी की सेहत पर भारी पड़ रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग की एक ताजा रिसर्च में सामने आया है कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक मिट्टी में मौजूद जरूरी सूक्ष्मजीवों को तेजी से खत्म कर रहे हैं, जिससे भविष्य में फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यह अध्ययन 31 मार्च 2026 को एक्टा साइंटिफिक एग्रीकल्चर जर्नल में प्रकाशित हुआ।रिसर्च का नेतृत्व वैज्ञानिक राजनी यादव और प्रो. आनंद नारायण सिंह की टीम ने किया। अध्ययन में ऑर्गेनोक्लोरीन (एल्ड्रिन) और ऑर्गेनोफॉस्फेट (फोरेट) जैसे कीटनाशकों के प्रभाव का परीक्षण किया गया। इसके लिए सात अलग-अलग ट्रीटमेंट तैयार कर 1, 7, 14 और 21 दिन के अंतराल पर मिट्टी के सैंपल जांचे गए।नतीजों में पाया गया कि कीटनाशकों के इस्तेमाल से बैक्टीरिया,फंगस औएक्टिनोमाइसीट्स जैसे महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीवों की संख्या में लगातार गिरावट आई। पहले ही दिन बैक्टीरिया में 17 से 45 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई, जो सातवें दिन कुछ मामलों में 54 प्रतिशत तक पहुंच गई। वैज्ञानिकों के अनुसार यह गिरावट मिट्टी की जैविक गतिविधियों को कमजोर कर सकती है, जिससे पौधों को मिलने वाला पोषण और उनकी वृद्धि प्रभावित होती है। खास तौर पर ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशकों का असर सबसे अधिक देखा गया।प्रो. आनंद नारायण सिंह ने बताया कि ये सूक्ष्मजीव ही खेती की रीढ़ हैं, जो जैविक पदार्थों को विघटित कर पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं और मिट्टी की संरचना बनाए रखते हैं। इनकी कमी से जमीन की उर्वरता धीरे-धीरे घट सकती है।शोधकर्ताओं ने किसानों से संतुलित मात्रा में कीटनाशकों के उपयोग और जैविक खेती व प्राकृतिक विकल्प अपनाने की अपील की है।