दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 01 नवंबर 2026. पंजाब में नशा तस्करी से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्यभर में 35 विशेष एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) अदालतें स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इन अदालतों के संचालन के लिए 385 नए पदों को भी स्वीकृति दी गई है। इस पहल का उद्देश्य नशा तस्करी के मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करना है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब नशा तस्करी और नशीले पदार्थों के सेवन की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। राज्य में हर साल लगभग 20 हजार एनडीपीएस मामले दर्ज होते हैं और करीब 27 हजार गिरफ्तारियां होती हैं। इनमें से लगभग 12 हजार मामलों की सुनवाई सत्र अदालतों में होती है, जबकि प्रतिवर्ष केवल 5,700 मामलों का ही निपटारा हो पाता है।
प्रवक्ता के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक पंजाब की अदालतों में एनडीपीएस के 52,577 मामले लंबित थे। मुकदमों के निपटारे की धीमी रफ्तार के कारण एक मामले के फैसले तक पहुंचने में औसतन आठ वर्ष लग जाते हैं। ऐसे में विशेष अदालतों की स्थापना से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने आगामी पांच से सात वर्षों में पुराने लंबित मामलों का निपटारा करने के लिए अतिरिक्त विशेष एनडीपीएस अदालतों की आवश्यकता का आकलन किया था। इसी के आधार पर कैबिनेट ने पहले चरण में 35 विशेष अदालतें स्थापित करने की मंजूरी दी है।
इन अदालतों के लिए स्वीकृत 385 पदों में 35 अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, 315 सहायक स्टाफ सदस्य और 35 सहायक जिला अटॉर्नी के पद शामिल हैं। इसके अलावा अदालतों के बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए लगभग 75 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट को भी मंजूरी दी गई है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि नई विशेष एनडीपीएस अदालतों के पूरी तरह कार्यशील होने तक मौजूदा नामित अदालतें पहले की तरह अपना कामकाज जारी रखेंगी, ताकि मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि समर्पित अदालतें नशा तस्करी से जुड़े मुकदमों के शीघ्र निपटारे, सुनवाई में होने वाली देरी को कम करने और लंबित मामलों का बोझ घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे सरकारी गवाहों के समय का बेहतर प्रबंधन भी संभव होगा।
इस फैसले से पंजाब में नशा तस्करी से जुड़े अपराधों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई को गति मिलने और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए एक समर्पित व्यवस्था तैयार होने का रास्ता साफ हुआ है।